निर्वाण भूमि श्री गिरनार जी तीर्थराज के उन्नत सिद्ध शिखरों पर आध्यात्मिक समरसता का शंखनाद: आचार्य सुनीलसागर जी गुरुराज संघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश

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निर्वाण भूमि श्री गिरनार जी तीर्थराज के उन्नत सिद्ध शिखरों पर आध्यात्मिक समरसता का शंखनाद: आचार्य सुनीलसागर जी गुरुराज संघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश

   गिरनार 

“गिरनार की पावन पुकार, समरसता का संकल्प अपार; नेमी प्रभु के चरणों में शीश झुकाए, जागृत हो संस्कार!”

 गुजरात राज्य के जूनागढ़ क्षेत्र में स्थित सिद्धक्षेत्र गिरनार की पावन कंदराएँ इन दिनों एक अपूर्व आध्यात्मिक चेतना से स्पंदित हैं। दिगंबर जैन जगत् के प्रखर तपस्वी आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महामुनिराज ने अपने विशाल मुनिसंघ के साथ सात वर्षों के अंतराल के पश्चात इस सिद्ध भूमि पर ‘भव्य मंगल प्रवेश’ किया। यह अवसर केवल एक धार्मिक पद-विहार नहीं, बल्कि भक्ति, वैराग्य और सामाजिक समरसता की त्रिवेणी का साक्षात संगम सिद्ध हुआ है।

 

 

 

1. अमर इतिहास: यदुवंश का गौरव और मुनियों की निर्वाण भूमि गिरनार मात्र एक पर्वत नहीं, बल्कि जैन दर्शन के गौरवशाली इतिहास का जीवित साक्ष्य है। यह पवित्र धरा 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की दीक्षा, केवलज्ञान और निर्वाण स्थली है। यदुवंशी जैन राजकुमारों के त्याग की इस गौरवगाथा को आगे बढ़ाते हुए प्रद्युम्न कुमार, शम्बु कुमार और अनिरुद्ध कुमार जैसे महान यदुवंशी राजकुमारों सहित लगभग 72 करोड़ 700 जैन महामुनियों ने इसी पर्वतराज से मोक्ष प्राप्त किया है। यहाँ 2200 वर्ष पूर्व आचार्य धरसेन स्वामी ने केवली भगवन्तों से प्राप्त क्रमबद्ध ज्ञान को लिपिबद्ध करने हेतु मुनि पुष्पदंत जी और मुनि भूतबली जी को ‘षटखंडागम’ की रचना हेतु दिशा प्रदान की और आचार्य कुंदकुंद स्वामी जैसे मनीषियों ने इसे अपनी यात्रा व साधना से धन्य किया।

 

 

 

 

 

ऐसे पावन सिद्धक्षेत्र श्री गिरनार जी के संपूर्ण टोक व भगवान नेमीनाथ स्वामी के निर्वाण स्थल पांचवे टोक की आचार्य श्री संघ द्वारा परिक्रमा,चरण वंदन व भक्ति पूर्वक आनंदमई यात्रा दिनांक 15 जनवरी 2026

 

 

 2. अनुशासन और सकारात्मकता की अनुपम मिसाल

इस यात्रा की सबसे विशिष्ट उपलब्धि इसकी मर्यादा और अनुशासन रही। आचार्य श्री संघ के साथ देश के कोने-कोने से पधारे 2000 से अधिक श्रद्धालुओं, स्थानीय प्रशासन और दत्तात्रेय संस्थान के सदस्यों के बीच जो अद्भुत समन्वय दिखा, वह संपूर्ण भारत के लिए एक प्रेरक संदेश है। हज़ारों की भीड़ के बावजूद, प्रत्येक व्यक्ति के भीतर सेवा और सकारात्मकता का भाव था।

 

 3. प्रशासन की संवेदनशीलता:

भक्ति और सम्मान का संगम – गुजरात राज्य के गौरवशाली मुख्यमंत्री जी व उप मुख्यमंत्री जी के निर्देशन पर

जूनागढ़ कलेक्टर श्री अनिल जी रानावसिया, आईजी श्री नीलेश जी जांजडिया, एसपी श्री सुबोध ओडेदरा और डिप्टी साहेब श्री हितेश धांधल्या ने न केवल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, बल्कि श्री संघ के प्रति गहरा आदर भी प्रकट किया। प्रशासन के इसी सुरक्षात्मक कवच और सम्मानजनक व्यवहार के कारण आचार्य श्री संघ एवं समस्त जैन समुदाय ने अत्यंत आनंद और सरलता के साथ इस कठिन यात्रा को पूर्ण किया।

4. जैन समाज के नेतृत्व और भामाशाहों का समर्पण

इस दिव्य महोत्सव को सफल बनाने में गुजरात अंचल तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष श्री पारस जी बज (अहमदाबाद) और उदारमना भामाशाह श्री राजेंद्र जी कटारिया (अहमदाबाद) का अनुकरणीय सहयोग रहा। तीर्थक्षेत्र समिति के अध्यक्ष श्री जंबू प्रसाद जी जैन,शरद जी जैन चैनल महालक्ष्मी नई दिल्ली,विश्व जैन संगठन व श्री सुनील सागर युवासंघ के आव्हान पर देशभर के अनेकों राज्यों से हजारों श्रावकों की उपस्थिति ने आयोजन को भव्यता प्रदान की।

 

 

 5. सांप्रदायिक सौहार्द: स्थानीय दत्तात्रेय संस्थान का सहयोग

पर्वत पर स्थित दत्तात्रेय संस्थान (बाबा जी) का सहयोग अत्यंत हृदयस्पर्शी रहा। उनके द्वारा जैन संतों और श्रद्धालुओं का हँसते-मुस्कुराते हुए किया गया स्वागत भारतीय संस्कृति की ‘साझी विरासत’ और आपसी प्रेम का जीवंत उदाहरण बना।

 

 

 

 6. गुरुवाणी: तीर्थंकरों का पथ और विश्व कल्याण का संदेश

अपने मंगल उद्बोधन में आचार्य श्री ने तीर्थंकर परंपरा और भारतीय संस्कृति की एकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि—भगवान आदिनाथ ने हमें जीवन जीने की कला सिखाई, शांतिनाथ ने शांति का वैश्विक मार्ग दिखाया, नेमिनाथ ने वैराग्य की पराकाष्ठा का संदेश दिया और पार्श्वनाथ ने उपसर्गों को जीतकर आत्मकल्याण का पथ प्रशस्त किया।”

 

 

 

> गुरुदेव ने मैत्री भाव, सद्बुद्धि और विश्व कल्याण की मंगल भावना व्यक्त करते हुए संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं से ‘विचारों के परिवर्तन’ का आह्वान किया, जो आज के समय में विश्व शांति के लिए नितांत आवश्यक है।

 

 

 7. आगामी महोत्सव:

20वाँ आचार्य पदारोहण दिवस एवं ऐतिहासिक वंदना

आगामी 25 और 26 जनवरी को गिरनार की वंदना एक नया इतिहास रचने जा रही है। 25 जनवरी: पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज का ’20वाँ आचार्य पदारोहण दिवस’ पूर्ण भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा।

 

 

 26 जनवरी: इस पावन उपलक्ष्य में आचार्य श्री ससंघ अत्यंत भव्यता के साथ तीर्थराज की संपूर्ण टोंकों की वंदना करेंगे।

 

 

 

 विशेष उपलब्धि एवं गुरुदेव के अनुभव (संक्षिप्त विवरण)

आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के इस प्रवास के दौरान श्रीमान पारस जी तीर्थ क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष गुजरात व प्रमुख भामशाह परम गुरुभक्त श्रीमान राजेंद्र जी कटारिया (बाबूजी),जंबू प्रसाद जी राष्ट्रीय अध्यक्ष तीर्थ क्षेत्र कमेटी व विश्व जैन संगठन के प्रयास से जैन समाज को दशकों प्रतीक्षित चार बड़ी सफलताएँ प्राप्त हुईं:

 

सुरक्षा हेतु ऐतिहासिक कदम:प्रशासन द्वारा 5वीं टोंक से लेकर नीचे तक संपूर्ण मार्ग पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे* लगा दिए गए हैं, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी अब अभेद्य हो गई है।

 

 

जीर्णोद्धार की अनुमति: दूसरी टोंक पर स्थित भगवान अनिरुद्ध कुमार के चरणों की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए वन विभाग व सरकार से अनुमति प्राप्त हो गई है।

 

 

क्षेत्र का विकास:यात्रियों की सुविधा हेतु गिरनार में तीर्थ क्षेत्र कमेटी का स्थाई कार्यालय खोलने और टोंक के पास एक विश्राम गृह व जीर्णोद्धार योजना को आचार्य श्री ने अपनी मंगल सहमति प्रदान की है।

 

 

 दुर्गम वंदना का अनुभव: आचार्य श्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे लगातार चौथी टोंक की वंदना पर गए। उन्होंने इस दुर्गम मार्ग की कठिन यात्रा को साहस और भक्ति का प्रतीक बताया, जो श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणादायी है।

 

SMJ CHITRश्री सुनील सागर युवासंघ भारत से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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