श्री योगसागर महाराज की 47 वर्षों बाद हुआ चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी में मंगल आगमन हुई ऐतिहासिक अगवानी
चांदखेड़ी
परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के परम शिष्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज का शनिवार की प्रातः बेला में आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याण दिवस पर चंद्रोदय तीर्थ पर मंगल आगमन हुआ।
चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से जानकारी देते हुए प्रशांत जैन ने बताया कि क्षेत्र कमेटी गुरुदेव के आगमन से अत्यंत उत्साहित थी और उमंग उल्लास से भरपूर थी।

क्षेत्र की सीमा से कुछ दूर पूर्व पहुंचकर क्षेत्र कमेटी ने गुरुदेव का मंच पर विराजमान कर जय जयकारों के साथ मंगल आरती पद प्रक्षालन किया और अगवानी की।




उन्होंने बताया कि क्षेत्र पर मंगल आगमन अटरू रोड से मंदिर के उत्तरी दरवाजे से हुआ नगर में लगभग 21 स्वागत द्वारा लगाए हुए थे उन्होंने कहा कि भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक का अवसर होने से यह क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा अवसर था जब क्षेत्र पर गुरुदेव का आगमन हुआ एवं मुनि श्री के सानिध्य में ही भगवान आदिनाथ का अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न हुई
उन्होंने कहा कि आसपास के दूर दराज के भक्त भी गुरुदेव के दर्शन हेतु क्षेत्र पर पधारे एवं अपने क्षेत्र में आगमन हेतु निवेदन किया।गुरुदेव की एक झलक पाने को सभी आतुर थे।
गुरुदेव की अगवानी में बारा महिला मंडल एवम सारोला कला महिला मंडल का दिव्य घोष अगवानी करते हुए क्षेत्र पर लाया गया भव्य शोभा यात्रा में खानपुर महिला मंडल का भी विशेष सहयोग रहा।संपूर्ण अगवानी मार्ग को रंगोली के माध्यम से सजाया गया।
क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष श्री हुकम जैन काका, उपाध्यक्ष महेंद्र कांसल, अशोकसेठी, महामंत्री नरेश वेद, कोषाध्यक्ष गोपाल जैन एडवोकेट सह कोषाध्यक्ष कैलाश पापड़ीवाल, आहार विहार संयोजक महावीर कालू, अनिल जैन, नीतेश जैन, सुरेंद्र सोनी, ओम जैन लीमी ने क्षेत्र के प्रवेश द्वार पर महाराज श्री की मंगल अगवानी पद प्रक्षालन एवम मंगल आरती कर की
श्री प्रशांत जैन ने बताया कि आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याण का अवसर पर भगवान आदिनाथ के दर्शन करने हेतु एवं गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु भामाशाह श्रेष्ठी श्रीमति सुशीला पाटनी एवं अखिल भारतीय दिगंबर जैन महिला महासमिति की शीला डोंडिया भी पहुंची।
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री योगसागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि आज भगवान का मोक्ष कल्याणक भी है और आज भगवान के चरणों में आने का अवसर प्राप्त हुआ धर्म का सारभूत लक्षण है जो अपने लिए चाहो वह वह दूसरों के लिए भी चाहो जो अपने लिए नहीं चाहो वह दूसरों के लिए भी मत चाहो यही धर्म का सारभूत लक्षण है। सबका कल्याण हो यही वीतराग धर्म है। भगवान ने उपदेश दिया कि सबका कल्याण हो। भगवान जैसे हम भी बने ऐसे भाव करे हम भगवान के चरणों में ऐसी प्रार्थना करते हैं कि आप जैसी शक्ति हमें भी प्राप्त हो।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

