*लपरम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर बीलवा जयपुर श्री शांतिनाथ महामण्डल विधान का हुआ भव्यता के समापन*
मनुष्य को ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे शुभ कर्म का बंध हो ,और दुख से छुटकारा हो,दुख में भगवान को याद करने का हक उसी को है जिसने सुख में उसका शुक्रिया अदा किया हो आर्यिका विज्ञाश्री
जयपुर/
भारत गौरव आर्यिका रत्न 105विज्ञा श्री माताजी के पावन सानिध्य में चल रहे 28वें दीक्षा महोत्सव का तथा शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्यता के समापन स हर्ष हर्षोल्लास से सम्पन्न हुआ।जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि आज प्रातः श्री जी का
जिनाभिषेक, शांतिधारा होने के तत्पश्चातपूज्य गुरु मां ने अपने मंगलमय प्रवचन में श्रावकों को संबोधित भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है संगीत कीर्तन बन जाता है, भक्ति जब सफर में प्रवेश करती है सफर तीर्थयात्रा बन जाता है ,भक्ति जब भूख में प्रवेश करती हैं भूख व्रत बन जाती है ,भक्ति जब घर में प्रवेश करती है घर मंदिर बन जाता है भक्ति जब व्यक्ति में प्रवेश करती है , व्यक्ति मानव बन जाता है भक्ति जब पानी में प्रवेश करती है चरणामृत बन जाता है , कार्य ऐसे करो जिससे शुभ कर्म का बंध हो और दुःख से छूटकारा हो दुःख में भगवान को याद करने का हक उसी को है जिसने सुख में उसका , शुक्रिया अदा किया हो ।
दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोय जो सुख में सुमिरन करे तो दुःख काय को होय इस लाइन को जिसने अपने जीवन में उतार लिया उसी का जीवन सुखी बन गया। कार्यक्रम बाद आर्यिका श्री ने सभी भक्तजनों को मंगलमय आशीर्वाद दिया।
राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान
