आचार्य श्री पुलक सागर महाराज ने क्रोध पर नियंत्रण करने और मोबाइल के अति उपयोग से बचने की सीख दी
आंतरी आंतरी गांव में आयोजित धर्मसभा मेंआचार्य श्री 108 पुलक सागरजी महाराज ने अपने ओजस्वी व प्रेरणादायी प्रवचन के माध्यम से पारिवारिक जीवन, संस्कार और सामाजिक समरसता पर गहन प्रकाश डाला।
गुरुदेव ने कहा कि “ससुराल बदलने से स्वर्ग नहीं मिलता, लेकिन यदि इंसान अपना व्यवहार बदल ले तो वहीं ससुराल स्वर्ग बन जाता है।” इस सारगर्भित। संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। आचार्यश्री ने कहा कि आज परिवारों में। बढ़ते तनाव, कलह और टूटते रिश्तों का मूल कारण अहंकार, क्रोध और कटु वाणी है। यदि व्यक्ति अपनी भाषा को मधुर, सोच को सकारात्मक और व्यवहार को संयमित बना ले तो घर में स्वतः ही प्रेम, विश्वास और सौहार्द का वातावरण बन जाता है। 


उन्होंने महिलाओं के प्रति सम्मान, बड़ों की आज्ञा का पालन और छोटे-बड़ों के बीच समन्वय बनाए रखने पर विशेष बल दिया। गुरुदेव ने कहा कि धर्म केवल मंदिरों या प्रवचनों तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में सत्य, अहिंसा, क्षमा और संयम को अपनाना ही सच्चा धर्म है। गृहस्थ जीवन में यदि ये मूल्य उतर जाएं तो साधारण घर भी तीर्थ बन जाता है। 




युवाओं को। संबोधित करते हुए उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण, मोबाइल की अति से बचाव, नशे से दूरी और अच्छे संस्कारों को जीवन में उतारने की सीख दी। उन्होंने कहा कि बेटियों बहुत पढ़ाओ, उन्हें आत्मनिर्भर बनाओ, लेकिनसंस्कार देना न भूलें। शिक्षा के साथ संस्कार जुड़ जाएं तो समाज मजबूत बनता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा। कि आज बेटियां कराटे सीख रही हैं, आत्मरक्षा में निपुण बन रही हैं और यह समय की आवश्यकता है।
यदि बेटियां कराटे सीख रही हैं तो बेटे परांठे बनाना सीखें। दोनों ही आवश्यक हैं। धर्मसभा में समाज के विभिन्न वर्गों के श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
