अकेले रहने-चलने-जीने और खडे़ रहने का साहस रखो..क्योंकि अपने लोग वक्त पर ज्ञान तो देते हैं पर साथ नहीं..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
औरंगाबाद/जयपुर दिल्ली हायवे। अंतर्मना आचार्य श्री108 प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज की अहिंसा संस्कार पदयात्रा जयपुर राजस्थान की और चल रही है उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि एक बच्चा अकड़ में खडा था। मैं झूकूंगा नहीं – कुछ देर तो खड़ा रहा पर अचानक उसके हाथ से चॉकलेट नीचे गिर गई। मैं झुकूंगा नहीं। तभी एक दूसरा बच्चा आया और वह चॉकलेट उठाया और भाग गया। वह बच्चा चॉकलेट लेने के लिये उसके पीछे दौड़ रहा है। बच्चा अकड़ में था। मैं झूकूंगा नहीं । चॉकलेट दांव पर थी।
कितनी बार हम भी जानते और समझते हुये भी ऐसे ही अकड़े रह जाते हैं। झूठा अहंकार, बेकार की जिद्द, हमें अपनी चीजों को जानने, समझने और ढंग से सम्भालने से रोक देती है। हम अपनों से ही टकराने लगते हैं। झूठे गुमान के बहाव में, सही भावों को समझने से रह जाते हैं। ठीक है – कई बार अड़ना जरूरी होता है, गलत के सामने अपनी बात पर टिके रहना ही एक मात्र विकल्प होता है,, पर हमेशा ऐसा नहीं होता है। हम ही समझदार और सर्वदर्शी की सोच हमें दूसरों को सुनने और समझने से रोक देती है।
अक्सर हमारा विरोध, हमारे हितों का टकराव, हमारे अपनों के साथ ही होता है। हमारे फैसलों से बहुत सारे लोग जुड़े होते हैं। आपने ध्यान दिया हो – फुटबॉल को तेज आगे बढ़ाने के लिए, खिलाड़ी पहले कुछ कदम पीछे जाता है और फिर तेजी से गोल की दिशा में हिट कर देता है।
उन्होंने अपने व्रत के विषय में कहा कि जब हम सिंह निष्क्रीडित व्रत कर रहे थे, वो भी ऐसा ही था,, दो कदम पीछे फिर चार कदम आगे बढ़ा देता था। कई बार सफलताओं की दिशा में बढ़ने के लिए, हमें खुद को कुछ समय के लिए पीछे करना पड़ता है। नीचे झुककर अपने साथ, दूसरों को भी ऊंचा उठाना हमें सफलताओं की ओर ले जाता है।


उन्होंने कहा जब लक्ष्य और मकसद बड़ा हो तो तालमेल बिठाना, समझौता करना, विपक्ष की बातों को सरल मन से सुनना, अपनी ग़लती को सुधारना और गलतफ़हमी हो तो दूर करना, मैत्रीपूर्ण वातावरण से अपने कार्य को सिद्ध करना, झुकना नहीं कहलाता…!!!
आज परम पूज्य गुरुदेव अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज जी ससंघ का भव्य मंगल 👣 पद विहार दिनाँक 16 जनवरी 2026, शुक्रवार सुबह 7 बजे आचार्य रत्न देशभूषण आश्रम अचरोल जिला जयपुर से दुर्गा माता मंदिर ट्रस्ट*, नियर कुकस, जिला जयपुर, राजस्थान 14.5 किलोमीटर के लिए हुआ।
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




