भव्य रजत रथयात्रा के साथ निर्वाण लाडू का हुआ अर्पण एवं पिच्छिका परिवर्तन समारोह संपन्नदिगंबर साधुओं के अहिंसा महाव्रत के पालन करने के लिए मयूर पीछी आवश्यक होती हैआर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी

धर्म

भव्य रजत रथयात्रा के साथ निर्वाण लाडू का हुआ अर्पण एवं पिच्छिका परिवर्तन समारोह संपन्नदिगंबर साधुओं के अहिंसा महाव्रत के पालन करने के लिए मयूर पीछी आवश्यक होती हैआर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी
अशोकनगर
दिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पीछी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है, पीछी और कमंडल मॉडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ है इनके बिना अहिंसा मय महाव्रत का पालन नहीं हो सकता आदान निक्षेपण समिति तथा प्रतिस्थापना समिति का पालन नहीं कर सकते ।

इस कारण समस्त दिगंबर साधु वर्ष में एक बार पीछी का परिवर्तन करते हैं, आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ने पीछी के गुण में बताया कि यह धूल ग्रहण नहीं करती, लघुता रहती है ,पसीना ग्रहण नहीं करती ,सुकुमार झुकने वाली होती है ।यहां तक भी देखा गया है कि मोर पंख यदि आंखों में लग जाए तो बहुत चुभता नहीं है इससे आंसू नहीं आते कष्ट नहीं होता ।सबसे बड़ी बात यह है कि मयूर स्वयं पंख छोड़ते हैं इस कारण कोई हिंसा भी नहीं होती। 

आज मंगल उपदेश में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ने पीछी परिवर्तन समारोह के अवसर पर कहा की संकल्प , शक्ति और उत्साह होने से पुरुषार्थ सफल होता है ।इसलिए अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी दीपक से दूर करने का प्रयास करें।

माताजी ने आगे बताया कि जिन्होंने संयम उपकरण पीछी देकर अनुमोदना की है, उन्होंने पुण्य का अर्जन किया है मयूर पीछी से कोमल वस्तु संसार में नहीं है इस महोत्सव को आपने आंखों से देखा है साधु एक वर्ष में मयूर पीछी से सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवो की रक्षा करते हैं ,अहिंसा महाव्रत के परिपालन का अन्य कोई उदाहरण देखने में नहीं आता है आपने जीवन में पुरुषार्थ से और पुण्य से जो अर्जित द्रव्य का सदुपयोग त्याग करने में पीछी देने में किया है इससे पुण्य की प्राप्ति होगी।आप भी संयम धारण कर जीवन को धन्य कर सकते हैं।
इसके पूर्व श्री जी का अभिषेक नित्य नियम पूजन , प्रथम तीर्थंकर 1008 श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक पूजन पश्चात चयनित सौभागशाली परिवार द्वारा श्री आदिनाथ भगवान को निर्वाण लाडू पूर्ण श्रद्धा भक्ति से आर्यिका संघ सानिध्य में चढ़ाया गया।आर्यिका संघ के मंचासीन होने पर आचार्य श्री के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन आमंत्रित अतिथियों , तथा स्थानीय अशोक नगर दिगंबर पंचायत के अध्यक्ष पदाधिकारियों ने किया। इसी क्रम में मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। एवम जिनवाणी भेंट की गई।

इस अवसर पर आर्यिका श्री विश्वयशमति माताजी ने भी संबोधित किया।मंच संचालन आर्यिका 105श्री विश्वयश मती ने किया। कार्यक्रम संचालन कर रहे जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा अनुसार श्री मद् जिनेन्द्र आदिनाथ निर्वाण कल्याणक महोत्सव रजत रथ त्रय पालकी यात्रा 28 जनवरी को नगर के प्रमुख मार्गों से समस्त महिला मंडल युवा मंडल, ट्रस्ट कमेटी द्वारा भव्य विशाल रथयात्रा आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी संघ सानिध्य में 10-वजे रथयात्रा निकाली गई जिसका समापन पंडाल में हुआ श्री आदिनाथ भगवान के कलशाभिषेक एवं शान्ति धारा हुई इसके बाद भगवान श्री आदिनाथ स्वामी के निर्वाण कल्याणक पर चयनित परिवार द्वारा लाड़ू समर्पित किया गया।इसके पश्चात आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी संघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह अंतर्गत परम पूज्य आर्यिका रत्न श्री सृष्टिभूषण मति माता जी अपने संघ के साथ संयम का उपकरण पिच्छिकाओ का परिवर्तन किया। जिन्हें लेने देने का सौभाग्य संयम के व्रत लेने वाले सौभाग्य शाली पात्रो को मिला।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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