शांतिसागर स्मारक बिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव की आमंत्रण पत्रिका का हुआ विमोचन
स्वार्थ का सम्बन्ध संसार से भी है और मोक्ष से भी है – आचार्य वर्धमान सागर जी
शताब्दी महोत्सव राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाएगा 21 को
निवाई – सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शान्तिसागर महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापना एवं शताब्दी महोत्सव के चलते शांति सागर स्मारक, बिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव एवं लोकार्पण समारोह संत निवास नसियां जैन मंदिर पर दिनांक 20 जनवरी से 21 जनवरी तक अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ आयोजित किया जाएगा जिसमें जैन समाज के सानिध्य में मकर संक्रांति पर्व पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज एवं जैन मुनि हितेन्द्र सागर महाराज संध के मंगल आशीर्वाद से बुधवार को विधिवत मंत्रोच्चार द्वारा महोत्सव की आमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया गया।
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सुनील भाणजा एवं विमल जौंला ने बताया कि आगामी 21 जनवरी को राष्ट्रीय शताब्दी समारोह धूमधाम से मनाया जाने को लेकर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने बुधवार को जयधोष के साथ आमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया जिसमें जैन समाज के अध्यक्ष नेमीचंद गंगवाल महावीर प्रसाद पराणा विनोद सुनारा मोहित चंवरिया, विमल गिन्दोडी़, जितेन्द्र चंवरिया, विष्णु बोहरा, अरुण लटुरिया, दिलीप भाणजा, अमित कटारिया, लालचंद कठमाणा, पारसमल पहाड़ी, महावीर प्रसाद शिखरचंद माधोराजपुरा, शंभु कठमाणा, सुशील नीरा जैन, पवन बोहरा , सुशील गिन्दोडी़, आशीष चंवरिया, सहित समाज के सेकंडों श्रद्धालुओं ने आमंत्रण पत्रिका का विमोचन करते हुए मूलनायक भगवान शांतिनाथ जी के चढ़ाकर पूजा अर्चना की। कार्यक्रम के तहत सरोज बंसल एवं बीना छामुनिया का जैन समाज निवाई ने स्वागत सत्कार किया।
कार्यक्रम के दौरान अग्रवाल समाज चौरासी महिला अध्यक्ष बीना छामुनिया ने आचार्य श्री को श्री फल भेंटकर आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि स्वार्थ का सम्बन्ध संसार से भी है और मोक्ष से भी है। संसार का स्वार्थ वासना कषाय वैमनस्य आदि रुप है दुर्गतियों का कारण है। जिसमें पढ़कर न जाने कितने महापुरुषों ने भी अपने पतन का मार्ग प्रशस्त कर लिया। आचार्य श्री ने विमोचन समारोह में कहा कि सही स्वार्थ वह है जो संसार शरीर भोगों से विरक्त कर परमार्थ में लगा दें, आत्मा को परमात्मा रूपी सांचे में ढाल दे, या परमात्मा के पथ पर आरुढ़ कर दे, उन्होंने कहा कि जो आज हमारा मित्र हैं वह आने वाले समय में हमारा शत्रु बन सकता है और जो आज हमारा शत्रु है वह कल का मित्र हो सकता है। अतः इस उलटती पलटती धूप छांव में किससे राग करुं और किससे द्वेष करुं। बन्धुओं जो भी स्वार्थ के पीछे नीति न्याय का उल्लघंन करेंगे एवं मर्यादाओं को तोड़ेंगे समय उन्हें नहीं बख्शेगा। अतः आप अपने जीवन में ऐसा स्वार्थ न कर बैठना जिससे दुर्गतियों में ठोकर खानी पड़े। उन्होंने कहा कि स्वार्थी बनना ही है तो परमार्थ के अध्यात्म के स्वार्थी बनना, व्यसनों का त्याग करना, संयम धारण करना, रत्नत्रय के पथ पर चलना, कषायों से परे होकर निर्मल स्वभाव को प्राप्त होना,यही सच्चा स्वार्थ है। 
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इस दौरान गोपाल कठमाणा ज्ञानचंद सोगानी, त्रिलोक सिरस, राकेश संधी, मनोज पाटनी, पारसमल पराणा, पदमचंद टोंग्या, राजेन्द्र सेदरिया, पारसमल बड़ागांव, शंभु कठमाणा, नवरत्न टोंग्या सहित अनेक लोगों ने अभिषेक शांतिधारा करके आचार्य महाराज की पूजा अर्चना की। जौंला ने बताया कि 21 जनवरी को राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने वाला शताब्दी समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है जिसमें देश भर से श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल होंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





