सादगी से रहने पर ही त्याग के भाव आते हैं ऐलक श्री विवेकानंद सागर महाराज
सागर
पूज्य ऐलक श्री विवेकानंद सागर महाराज ने कहा की सादगी से रहने पर ही त्याग के भाव आते हैं पवित्रता का जीवन जीने का हमें संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा की आवश्यकता के लिए जीवन पुरुषार्थ होता है जबकि आसक्ति का जीवन पाप का कारण बनता है। आवश्यकता के लिए जियो आसक्ति के लिए नहीं। अपने दान तो बोला है लेकिन चुकाया नहीं है जबकि दान समय पर चुकाना चाहिए। अपना धन उपकार में लगाओ हमेशा भला ही भला होगा। पूज्य श्री ने पारसनाथ मंदिर कटरा में यह बात कही

इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि अंधेरे में छाया, बुढ़ापे में काया और अंत समय में माया भी साथ नहीं देगी। आप लोग हर चीज माप कर खरीदते है। हर वह चीज जो आपके लिए उपयोगी है वह घर में खाने पीने की चीजे हो या अन्य कोई ऐसी कोई भी वस्तु हो इसको खरीदने के लिए या लाने के लिए इसका माप आपके जीवन में जरूर होता है। लेकिन धन के मामले में आपका माप निर्धारित नहीं है। इसे भी निर्धारित करना चाहिए। समर्थ होते हुए प्रतिकार करना गलत है। कषायो के बात ही सत्य उद्घाटित होता है। परिग्रह को कम करना चाहिए इससे सुख में वृद्धि होगी।
जब बादल जल्द से भर जाते हैं तो कल हो जाते हैं लेकिन जल जल का त्याग बारिश के रूप में करते हैं। बादल सफेद हो जाते हैं ज्यादा परिग्रह करने वाला नरक का बोध करने वाला होता है। उन्होंने कहा यदि आप सच्चे जैन है तो पर्युषण के 10 दिनों में धर्म आराधना करनी चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
