विशाल जुलूस के साथ स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ का जैन भवन में हुआ भव्य मंगल प्रवेश नई प्रतिभावान पीढी को सही दिशा दिखाना समाज का महत्वपूर्ण व आवश्यक कार्य है, स्वस्तिभूषण माताजी
टोडारायसिंह :-
भारत गौरव, स्वस्ति धाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका 105स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का रविवार को शहर के जैन भवन में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 9 बजे समाज बन्धुओं ने बस्सी चौराहे पर आर्यिका संघ की अगुवानी की। वहाॅं से गाजे बाजे के साथ सकल जैन समाजजन नाचते गाते शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुये आर्यिका संघ को जैन भवन लाया गया।
इस दौरान जगह जगह भक्तों ने गुरू माॅं की आरतीकर पाद प्रक्षालन कर आर्शीवाद लिया। जैन भवन के प्रवेश द्वार पर गुरू माॅं का 51 विशेष थाल सजाकर पाद प्रक्षालन किया। इस दौरान मंदिर परिसर भगवान के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
जैन समाज अध्यक्ष संत कुमार जैन और प्रवक्ता मुकुल जैन ने बताया कि इस मौके पर धर्मसभा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत चित्र अनावरण से कि गई जो कि अग्रवाल चौरासी समाज के नव नियुक्त अध्यक्ष अनिल मित्तल और और सभी जैन मन्दिरों के अध्यक्ष द्वारा किया गया। इंदु मित्तल ने मंगलाचरण किया ।

नई प्रतिभावान पीढी को सही दिशा दिखाना समाज का महत्वपूर्ण व आवश्यक कार्य है, माताजी
इसके बाद आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आजकल बेवकूफ बच्चे पैदा होना बंद हो गये हैं। नई प्रतिभावान पीढी को सही दिशा दिखाना समाज का महत्वपूर्ण व आवश्यक कार्य है, नही तो इनकी प्रतिभा का उपयोग गलत हो जायेगा।







माताजी ने कहा कि समय के साथ सब कुछ बदल जावे लेकिन देव ,शास्त्र, गुरु की भक्ति मत बदलना। धर्म की अंगुली पकड़कर चलते रहेंगे तो जीवन धन्य हो जाएगा। यदि धर्म छूट गया तो जीवन में विपदाओं की बाढ लग जाएगी। उन्होंने टोडा में मंगल प्रवेश को वात्सल्य प्रवेश बताया। इस अवसर पर उन्होंने टोडा में स्वाध्याय शुरु करने के लिए महिला-पुरूषों की एक टीम का गठन किया। इस अवसर पर समाज अध्यक्ष संत कुमार जैन ने कहा कि टोडा के लोगों का सौभाग्य है कि भारत गौरव, आर्यिका रत्न, स्वस्ति धाम प्रणेत्री, आर्यिका माताजी का टोडा में आगमन हुआ है। एक जैन श्रावक को पिच्छी व कमंडल का उपासक होना चाहिए और हर जैन मुनि व आर्यिका संघ का प्रवेश-आहार-विहार पूरी भक्ति व श्रद्धा के साथ कराना चाहिए। उन्होनें कहा कि जिस प्रकार एक रथ को चलाने के लिए चार पहियों की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार धर्मरूपी रथ को आगे बढाने के लिए मुनि-आर्यिका व श्रावक-श्राविका रूपी चार पहियों की बहुत जरूरत है। अगर एक भी पहिया अपने दायित्व व कर्तव्य से पीछे हटा तो धर्म का पहिया वहीं रूक जायेगा।
इस अवसर पर सकल जैन समाज के साथ पीपलू , केकड़ी, देवली , राजमहल , झिराना , आदि जगह से सैकड़ों श्रावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पंडित संजीव कासलीवाल ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




