मैं कौन हूं मेरा क्या है? यदि इस सत्य को जान लिया तो कभी आप दुखी नहीं रहोगे प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
जिंदगी” एक नाटक है जिसमें अभिनय से प्रभावित हो दर्शक रोने लगते है लेकिन अभिनेता पर उस रोल का कोई फर्क नहीं पड़ता उसी प्रकार जीवन में कर्म रुपी डायरेक्टर ने जीवन में हमें विभिन्न प्रकार के रोल दिये है, इस सत्य को पहचानो रीयल लाईफ के डायरेक्टर से तो आप उस रोल के लिये मना कर सकते हो लेकिन कर्म रुपी डायरेक्टर से आप मना नहीं कर सकते, इसलिये अपने आपको पहचानो और जानो कि मैं कौन हूं मेरा क्या है? यदि इस सत्य को जान लिया तो कभी आप दुःखी नहीं रहोगे” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने मोदीजी की नसिया नेमीनाथ दि. जैन रामाशाय मंदिर मल्हारगंज में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये।
मुनि श्री ने कहा कि मान लीजिये कोई व्यक्ति अपने घर में सो रहा है और वह स्वप्न देखता है कि उसका घर भयंकर आग की लपटों से झुलस गया है और वह आग जैसे ही उसके पलंग तक पहुंचती है कि उसके मुख से एक चीख निकलती है,और देखता है कि यह एक सपना था जैसे ही वह जागता है उसकी घबराहट दूर हो जाती है।

मुनि श्री ने कहा कि यह जिंदगी भी एक सपने के समान है,आध्यात्मिक दृष्टि का व्यक्ति अमीरी गरीबी या अच्छाई बुराई मान अपमान को एक स्वप्न के समान ही समझता है वह जानता है कि यह तो उसके पुण्य पाप रुपी कर्म के खेल है वह इसमें उलझता नहीं में जो हुं सो हुं जब यह बात किसी के अंतरंग में बैठ जाती है तो ऐसे व्यक्ति को क्या कोई दुःखी कर पाएगा?
आचार्य श्री ने लिखा है “यह सारा संसार एक विचित्र नाटक है जैसे नाटक में डायरेक्टर जो रोल देता है अभिनेता को वह रोल अपनी कला के माध्यम से करना पड़ता है वह उसमें अटकता नहीं इसी प्रकार संसार रुपी नाटक में तू भाग ले इसमें न अटक

मुनि श्री ने ईश्वरचंद विद्यासागर की एक घटना सुनाते हुये कहा वह एक नाटक देखने गये उस नाटक में युवक एक युवती के साथ छेडख़ानी कर बदतमीजी की सारी हदें पार कर रहा था वह उस नाटक में इतना अधिक खो गये कि वह उठे और उस अभिनेता के सिर पर जूता को दे मारा तो उस अभिनेता ने जूता अपने सिर पर रख कर कहा कि आज तक लाईफ में मुझे ऐसा लाईव अवार्ड नहीं मिला जो कि ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने दिया है वह यह भूल गये कि यह सब एक नाटक है।
मुनि श्री ने कहा कि इस संसार को खेल के रुप में देखो जैसे खेल में दो टीम होती है एक टीम जीतती है तथा एक टीम हारती है,उसी प्रकार जीवन में कभी हार तो कभी जीत कभी खुशी कभी गम का सामना करना पड़ता है और यह सुख दुःख आपके ही जीवन में नहीं आता यह महापुरुषों के जीवन में भी आया है, नारायण श्री कृष्ण का जन्म जेल में हुआ और कर्म ने छै दिन में ही मां से अलग कर दिया फिर कर्म ने उसे यशोदा मैया से मिलाया पाप कर्म आया कंस ने उसे मारने के कुचक्र रखे लेकिन पुण्य कर्म ने उसे बचाता रहा। मुनि श्री ने कहा पुण्य पाप का यह चक्र जीवन भर चलता रहता है और चलता रहेगा इसमें उलझो मत इसे स्वीकार करोगे तो आई हुई विपत्ति भी टल जाएगी।
धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया की 13 जनवरी सोमवार को पूर्णमासी के दिन मुनि श्री के मुखारविंद से 55 मिनट की शांतिधारा प्रातः 8 बजे से संपन्न होगी तथा 9 बजे से मांगलिक प्रवचन होंगे। धर्म प्रभावना समिति एवं मोदीजी की नसिया नेमीनाथ दि. जैन रामाशाय मंदिर के समस्त टृस्टीओं ने संपूर्ण इंदौर की जैन समाज से समय पर पधारने का अनुरोध किया है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
