मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश दमोह जिले के जबेरा में होगा* मंत्र” हमें मरने से नहीं बचाता लेकिन मरने का डर मिटा देता है- मुनि श्री प्रमाणसागर
दमोह ः
संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के शिष्य गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज का ससंघ मंगलविहार चल रहा है, मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनिसंघ की आहारचर्या नोहटा ग्राम में हुई एवं मंगल विहार कर रात्री विश्राम कलेहरा ग्राम में होकर प्रातः मंगल अगवानी एवं आहार चर्या जबेरा ग्राम में होगी… मुनि श्री ने नोहटा ग्राम जहा 100 घर की जैन समाज है, शंकासमाधान में कहा कि यह बहुत ही प्रसन्नता की बात है कि महाकौशल क्षेत्र के छोटे से छोटे गांव में धर्म का प्रभाव देखने में आ रहा है आज यहा आने के बाद मन बड़ा गदगद हो गया।
मुनि श्री ने कहा कि नोहटा का यह मंदिर और यह भगवान इस बात का प्रमाण है, कि कभी यह क्षेत्र हमारी संस्कृति का बहुत बड़ा केन्द्र रहा होगा तभी यहा पर पुरातात्विक वैभव नजर आ रहा है,और उसी का प्रभाव है कि समाज में देव गुरु के प्रति श्रद्धा भक्ती है,तथा छोटे से गांव में समाज की पर्याप्त संख्या है मुनि श्री ने कहा कि में आदीश्वरगिरी नौहटा पहलीबार आया हुं इसीलिये इस रास्ते को चुना मुनि श्री ने शंकासमाधान करते हुये कहा कि जो कर्म का नौकर है,अर्थात जिसके सहारे कर्म अपना फल देते है वह नौ कर्म कहलाते है, मुनि श्री ने कहा कि कही बार कर्म का ऐसा वेग आ जाता है,जो हमारी भावधारा को बिगाड़ देता है,लेकिन इसे हम अपनी प्रवृत्ति में देखें तो हमारे पतन का मुख्यकारण हमारा प्रमाद होता है,जितना हम चीजों से प्रभावित होंगे हमारे भाव भी उसी अनुसार चलते है अच्छे निमित्तों से “भाव” ऊपर बढ़ते है,एवं बुरे निमित्तों से पतन का कारण बनते है,यदि आप भावों से अप्रभावित रहना चाहते हो तो निमित्तों से अप्रभावित रहने की कला विकसित कीजिये हमारे भावों में स्खलन न हो तभी हम शिखर पर पहुंच सकते है।

मुनि श्री ने कहा कि भक्ति के अतिरेक में कही बार अविवेक हो जाता है,श्रावकों को विवेक रखना चाहिये कोई भी धर्म की क्रिया करो विवेक से करो हमेशा इस बात का ध्यान रखना विवेकपूर्ण छोटी सी क्रिया भी महान फल देती है विवेक के अभाव में की जाने वाली बड़ी बड़ी क्रिया का भी कोई लाभ नहीं मिलता इसलिये विवेक और अनुशासन दौनों का ध्यान रखना चाहिये।




पनागर जैन समाज के प्रश्न पर मुनि श्री ने कहा कि जितने भी धर्मायतन है उनको सबसे पहले संरक्षित और सुरक्षित करने के क्रम में अपने दस्तावेजों को डिजिटालाइजेशन कर कम्पलीट करें तथा गांवों से समाज का पलायन रुकना चाहिये यदि समाज का पलायन नहीं रुका तो हमें अपने मंदिरों को सुरक्षित रखना बड़ा कठिन हो जायेगा मुनि श्री ने कहा कि जो जनरेशन महानगरों की ओर भाग रही है वह यहा पर लौटकर नहीं आयेगी। मुनि श्री ने कहा कि पलायन का मुख्य कारण विवाह है आजकल युवतियां छोटी जगह जाने को तैयार नहीं होती भले ही वह खोटे परिवार में पहुंच जायें इस और ध्यान दैना चाहिये उन्होंने कहा कि गांवों में आज भी प्रेम परस्पर बंधुत्व की भावना और आत्मीयता कायम है जो कि शहरों में नजर नहीं आती ।।।
मुनि श्री ने कहा शिक्षा के आयतन और रोजगार के साधन को उपलव्ध कराना चाहिये।मुनि श्री ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि मंत्र आदि का जाप करने से हमें शांती मिलती है, हमारे दुष्ट कर्म झड़ते है,लेकिन वह हमारी आयु को नहीं बड़ा सकता हमें अमर नहींं बना सकता मंत्र और धर्म ध्यान का प्रभाव यह होता है कि मंत्र हमें मरने से नहीं बचाता लेकिन मरने का डर मिटा देता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


