जिंदगी में यदि खुश होकर जीना है तो दूसरों की जिंदगी में अपनी जगह ढूंढना बंद करो अन्यथा जिंदगी भर रोते ही रहोगे अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज 

धर्म

जिंदगी में यदि खुश होकर जीना है तो दूसरों की जिंदगी में अपनी जगह ढूंढना बंद करो अन्यथा जिंदगी भर रोते ही रहोगे अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज

औरंगाबाद दिल्ली

अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पीयूष सागरजी महाराज ससंघ अहिंसा संस्कार पदयात्रा के दरम्यान दिल्ली के गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि दूसरों के जुड़ने और जोड़ने के कारण ही हमारे अन्दर पाप और बुराईयों का समावेश होता रहता है। आदमी पाप क्यों करता है-? सिर्फ काम, क्रोध और इच्छाओं की पूर्ति के खातिर आदमी इतने पाप कर लेता है, कि उन पापों के बोझ से कमर झुक जाती है और फिर पाप का बोझ ढ़ो नहीं पाता है। कामना-वासना आदमी को अन्धा बना देती है।

 

 

 

क्रोध में आदमी होशोहवास खो देता है, और इच्छाओं की पूर्ति के लिये आदमी, ना दिन देखता है ना रात। आदमी भूल जाता है कि क्या अच्छा और क्या बुरा कर रहा हूँ मैं-? आदमी गहरी मूर्च्छा और मूढ़ता में यही भूल जाता है कि इसका अन्जाम हमको ही भोगना पड़ेगा, फिर अच्छे और बुरे का विवेक ही नष्ट हो जाता है।

 

 

 

 

 

इसलिए मैं कह रहा हूँ – 23 घन्टे सबसे बात करो लेकिन एक घन्टे सब कुछ छोड़कर स्वयं से बात और सम्वाद करो। इससे हमें अच्छे और बुरे कार्य करने का बोध होगा और परमात्मा से निकटता बढ़ेगी…!!!

 

 

 

 

अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ससंघ का विहार दिनाँक 6 जनवरी 2026, मंगलवार दिन में 2 बजे महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, भोगल, दिल्ली से आध्यात्म साधना केन्द्र, छतरपुर टेम्पल रोड, डाक्टर अम्बेडकर कॉलोनी, महरोली,छतरपुर, नई दिल्ली के लिए होगा।

 

 

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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