आर्यिका 105 विश्व रत्ना माताजी का समाधि मरण
सुसनेर।
गुरुवर आचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका 105 विश्व रत्ना माताजी ने बुधवार को सायं 6 बजकर 15 मिनट पर अपने नश्वर देह का त्याग कर समाधि मरण प्राप्त किया। वे वात्सल्य, त्याग, तपस्या एवं आध्यात्मिक ज्ञान की प्रतिमूर्ति थीं।
आर्यिका माताजी का संपूर्ण जीवन अहिंसा, संयम और साधना के उच्च आदर्शों को समर्पित रहा। उनके समाधि मरण की सूचना मिलते ही सुसनेर सहित आसपास के क्षेत्रों में जैन समाज में शोक की लहर व्याप्त हो गई।
आर्यिका माताजी की डोल यात्रा एवं गुरुवार को प्रातः 8 बजे दिगंबर जैन बड़ी धर्मशाला, इतवारिया बाजार से निकाली जाएगी।
एक परिचय आर्यिका माताजी
इनका गृहस्थ अवस्था का नाम रतन बाई था इनका जन्म सन 1937 में भिंडर राजस्थान में श्रीमान कन्हैयालाल श्रीमती रूपा बाई पचौरी की बगिया में हुआ आपने शिक्षा अध्ययन कक्षा 5 तक किया
20 नवंबर 2023 को आचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज ने उन्हें क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की और नामकरण करते हुए क्षुल्लिका 105 विश्व रत्ना माताजी का नाम दिया गया।
29 दिसंबर 2025 की पावन बेला में मुनि श्री 108 विवर्धन सागर महाराज ने आर्यिका दीक्षा प्रदान करते हुए उन्हें आर्यिका 105 विश्वरत्ना श्री माताजी नाम दिया आपने निर्यापकाचार्य मुनि श्री 108 विवर्धन सागर महाराज आदि 7 पिच्छिका साधुओं की उपस्थिति सल्लेखना पूर्वक समाधि करते हुए इस नश्वर देह को त्याग दिया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312







