मनुष्य सब कुछ पा सकता है लेकिन शांति प्राप्त करने
भगवान के पास ही चलकर आना होगा: प्रमाण सागर महाराज महाराज श्री संघ का दमोह में मंगल प्रवेश
दमोह
कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच भी श्रद्धा की आंच कम नहीं पड़ी। वक्त था सोमवार की सुबह संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महा मुनिराज के शिष्यमुनि श्री108 प्रमाण सागर महाराज संसंघ का शहर में मंगल आगमन का।
सुबह से छाए घने कोहरे के बावजूद जैसे ही मुनिसंघ ने शहर
की सीमा सागर नाका में प्रवेश किया, पूरा वातावरण भक्ति,
जयघोष और धर्म भाव से आलोकित हो उठा। कोहरे की सफेद चादर में लिपटी सड़कों परश्रद्धालुओं की आस्था स्पष्ट दिखाई दे रही थी। सागर नाका से लेकर तीन गुल्ली तक और तीन गुल्ली से लेकरकिल्लाई नाका, विजय नगर और नेमीनगर करीब 3 तीन किलोमीटर लंबे मार्ग को तोरण द्वार से सजाया गया था। घरों के सामने औ रतिराह्य-चौराहे पर रंगोलियां सजाई गईं, जैन धर्म ध्वजाएं फहराई गईं और श्रद्धालु अपने-अपने द्वार पर मुनिश्री के चरण पखारने व मंगल आरती उतारने के लिए उत्सुक थे।
ठंड और मौसम की प्रतिकूलता भी श्रद्धा के इस भाव को रोक नहीं सकी। मुनिद्वय एवं पांच क्षुल्लकों के साथ जैसे ही
मंगल प्रवेश हुआ, आचार्य गुरुदेव के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से जय जय गुरुदेव के उद्घोष किए, जिससे घना कोहरा भी मानो छंटता प्रतीत हुआ। मुनि संघ के साथ सैकड़ों श्रद्धालु चल रहे थे। बच्चे धर्मध्वजा लेकर जयघोष करते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे।






मुनि ससंघ सानिध्य में कृषि मंडी के पास स्थित जिनालय में दर्शन-पूजन अभिषेक हुआ। औरफिर नेमीनगर स्थित जैन मंदिर
पहुंचे। यहां से विजय नगर स्थितजैन मंदिर पहुंचे।
अंदर की शांति तभी मिलती है, जब हृदय में आध्यात्मिकता का प्रकाश प्रकट होता है: मुनि श्री
मुनिश्री ने विजयनगर स्थित जिनालय के दर्शन किए एवं चौक पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी लोग बड़े भाग्यशाली हो, आपको बड़े बाबा के चरण पखारने का और गुरुदेव का भरपूर आशीर्वाद मिला, इसीलिए गुरुदेव ने दमोह को बड़े बाबा का प्रवेश द्वार कहा था। मुनिश्री ने कहा कि आप लोगों ने इतने बिगड़े मौसम में भी इतनी बड़ी संख्या में आकर श्रद्धा और भक्ति दिखाई
है। वह इस बात का प्रमाण है कि आप लोग गुरुओं के प्रति समर्पित है और इसीलिए गुरुदेव के जाने के बाद आचार्य श्री का आचार्य पदारोहण बड़े बाबा के दरबार में ही संपन्न हुआ।
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य अपने प्रयत्नों से इस संसार की प्रत्येक वस्तु को पा सकता है, लेकिन शांति को प्राप्तकरने के लिए उसे भगवान के पास ही चलकर आना होगा। उन्होंने कहा कि जिसको सत्य का भान होता है, वह पूराजीवन भगवान, गुरू तथा धर्म के प्रति समर्पित कर देता है।
मुनि श्री ने कहा कि संसार की सभी बाहरी उपलब्धि उपलब्ध हो सकती है, लेकिन अंदर की शांति तभी मिलती है जब हृदय में आध्यात्मिकता का प्रकाश प्रकट होता है। सभी को शांति चाहिए तो भगवान के चरणों में अपने आपको समर्पित कर दो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



