अन्तर्मना उवाच 29 दिसंबरवात्सल्य रत्नाकर गुरूदेव के 31 वें समाधि महोत्सव पर अनन्त प्रणाम। अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
औरंगाबाद/गाजियाबाद
वात्सल्य रत्नाकर महा महिम गुरूदेव की निकटता का ये 1986 का प्रसंग है — उनके गुणों की कीर्ति के चर्चे, तो सुनते सुनते मेरा मन बहुत उत्कुंठित हो उठा। कब उस महान आत्मा के दर्शन होंगे-?
दिन प्रतिदिन यह तलब, पता नहीं क्यों बढ़ती ही जा रही थी। और अचानक गोमटगिरी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में, आचार्य पुष्पदंत सागर जी महाराज के साथ जाने का एवं सद्गुरु दर्शन लाभ का सौभाग्य जाग उठा और आचार्य श्री के साथ गोमटगिरी को निकल पड़े। जब उनको देखा, तो ऐसा लगा — धरा जब हजारों वर्ष तपस्या करती है,, तब कहीं जाकर, वात्सल्य दिवाकर आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज जैसे महान देव तुल्य सन्त आत्मा इस धरा पर जन्म लेती है। उनके दर्शन मात्र से जीव को, अपनी सम्पूर्ण कामनाएं, पूर्ण होने का विश्वास जागृत हो जाता था। उनके दर्शन एवं आशीर्वाद से राष्ट्रीय दलित, शोषित, पीड़ित मानव की सेवा से ऊपर उठकर सम्पूर्ण जगत के जीव मात्र की सेवा करने की इच्छा जागृत होती थी। उन वात्सल्य रत्नाकर गुरुदेव के चरणों में मेरा शत शत नमन स्वीकार करें।



_हे गुरुदेव -ऐसी शक्ति मुझे प्रदान करें,, आपका प्रभाव मेरे जीवन में स्वर्णांकित बना रहे…!!!

आज तरुणसागरम तीर्थ परसाधना महोदधि अंतर्मना गुरुदेव आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज के दर्शनार्थ हेतु वियतनाम से पधारे महानुभाव ,सभी ने कहा “सुना काफी था जैन धर्म के बारे में आपके और आपकी साधना और चर्या के बारे में आज आपका साक्षात्कार कर प्रभावी हुए है
र मास 1 उपवास मै से किसी भी 1 प्रकार से करने का संकल्प लिया” अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया
णमो आइरियाणं
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

