भौतिकता की चकाचौंध तुम्हें पराधीन बनाती है सुधा सागर महाराज
टीकमगढ़
पूज्य मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने मंझार जैन मंदिर में अपने उद्बोधन में कहा कि हर व्यक्ति यह चाहता है कि मेरे अंदर ऐसी शक्ति सामर्थ्य जाग जाए कि मुझे किसी के अधीन ना होना पड़े। आप लोगों को स्वाधीन बनना है, किसी के पराधीन होकर अपना जीवन नहीं कब आना है। श्रेष्ठतम व्यक्ति वह नहीं है जिसके साथ दुनिया है। जिसके साथ जितने लोग हैं समझ लेना वह उतना ही कमजोर है।
इसका उदाहरण देते हुए मुनि श्री ने कहा कि किसी भी तरफ से देखो जितने ज्यादा लोग उसके आगे पीछे होंगे समझ लेना वह कमजोर व्यक्ति की निशानी है यह बहुत बड़ी कमजोरी है। उन्होंने राष्ट्रपति का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च पद वाला व्यक्ति होता है उसकी सुरक्षा दूसरे के हाथ में होती है। वह अपनी सुरक्षा स्वयं नहीं कर सकते।


तुम श्रावक लोग तो लाइसेंस लेकर बंदूक रख सकते हो, राइफल रख सकते हो, डंडा भी अपनी सुरक्षा के लिए ले सकते हो। लेकिन राष्ट्रपति तो कोई लाइसेंसी बंदूक भी नहीं रख सकते हैं। यानी अपनी जान बचाने के लिए भी अधिकार नहीं है। उनकी जान तो पुलिस वाले बचाएंगे। उनका प्रोटोकॉल बचाएगा। उनकी सुरक्षा में लगे सैनिक बचाएंगे। यह कहां सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि यह एक विचारणीय विषय है और हम जब विचार करते हैं तो वह बड़ा आदमी जिसके बाद जितनी सुरक्षा है कितना बड़ा प्रोटोकाल होगा। साइकिल चलाने वाले की जिंदगी स्वयं उसके हाथ में होती है, लेकिन करोड़ों की कीमत वाली गाड़ी में बैठने वालों की जिंदगी दूसरों के हाथ में होती है। वह मालिक तो करोड़ों की गाड़ी का है, लेकिन उसकी जिंदगी ड्राइवर के हाथ में होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भौतिकवाद की चकाचौंध तुम्हें पराधीन बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि महानुभव पराधीन नहीं बनो स्वाधीन बनो। वही हमारी आत्मा का कल्याण करने वाला होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
