उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने लिया मुनि श्री आदित्य सागर महाराज का आशीर्वाद जीवन में सफल इंसान बनने के लिए धुन (जुनून) का होना जरूरीमुनि श्री आदित्य सागर महाराज
मदनगंज-किशनगढ़
श्रुतसंवेगी महाश्रमण मुनिश्री आदित्य सागर महाराज ने कहा कि जीवन में सफल तो होना सभी चाहते हैं पर बहुत कम लोग ही सफल होते हैं।उसकी वजह वह स्वयं ही है क्योंकि वही अपने दिमाग को अलग-अलग, गलत रास्ता दिखता है। हमेशा सफलता पाने के लिए सकारात्मक और सही दिशा में, सही गति के साथ मेहनत करना चाहिए।
मुनि श्री ने रविवार को आरके कम्युनिटी सेंटर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफल होने का जरिया केवल धुन (जूनून) ही है। उन्होंने कहा कि सफलतम इंसान ने जो हर समय मेहनत की है पर उसका प्रतिफल का बीज किसी को नहीं दिखता है, बस हर कोई फल देखता है। महान लोग सफल क्यों होते हैं क्योंकि वह भी मेहनत देखते हैं, बीज देखते हैं वह फल नहीं देखते जो लोग फल देखते हैं वह कभी बीज नहीं डाल सकते है। महान पुरुष अपने लक्ष्य की प्राप्ति की धुन में ही रहते हैं। सफलता पाने के लिए दृढ़ संकल्प (धुन/जुनून) होना आवश्यक है जो अंतिम लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक होते हैं धुन व्यक्ति को मुश्किल समय में भी अपने लक्ष्य पर टिके रहने के लिए प्रेरित करती है।

जब चुनौतियाँ आती हैं और असफलताएँ मिलती हैं, तो केवल जुनून ही व्यक्ति को हार मानने से रोकता है। उन्होंने कहा परिस्थितियों चाहे जीवन में अनुकूल हो या प्रतिकूलधुन पर धुनी व्यक्ति कभी भी बाहरी प्रेरणा निर्भर नहीं करती। यह एक आंतरिक आग है जो व्यक्ति को मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है जब व्यक्ति में किसी चीज को पाने की तीव्र इच्छा होती है, तो वह समस्याओं को बाधाओं के रूप में नहीं, बल्कि हल की जाने वाली चुनौतियों के रूप में देखता है। जुनून व्यक्ति को अपने लक्ष्य पर अत्यधिक ऊर्जा और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति देता है। यह उसे अनावश्यक विकर्षणों से बचाता है और उसकी सारी शक्ति को सही दिशा में लगाता है।
महान पुरुष अपने लक्ष्य की प्राप्ति की धुन में आगे बढ़ते जाते हैं जिसकी धुन रहती है वह सब कुछ कर सकता है महान पुरुष अपने लक्ष्य की प्राप्ति की धुन में आगे बढ़ते जाते हैं उन्हें पीछे से कोई मतलब नहीं होता मुनि श्री ने कहा कि धुन में लगे रहो लेकिन परिश्रम सही दिशा में हो, गति धीमी हो तो चलेगी परिश्रम करना कभी बंद मत करना।
खरगोश की तरह हार जाओगे कछुए की गति धीमी थी लेकिन उसकी दिशा सही थी वह चलता गया चलता गया चला गया सफल हो गया खरगोश की गति थी पर दिशा सही नहीं थी उसका परिश्रम व्यर्थ हो गया।इससे पूर्व सभा में चित्रअनावरण, दीप प्रज्जवलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी विनोद कुमार सुनीलकुमार मनोजकुमार पाटनी परिवार भड़स्या वाले को मिला। सायंकालीन श्रुत-समाधान एवं आरती की गई।

उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने लिया आशीर्वाद।
मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज से रविवार को आरके कम्युनिटी सेंटर में राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रवचन सभा के दौरान उपमुख्यमंत्री बैरवा आरके कम्युनिटी सेंटर उपस्थित हुए उन्होंने मुनि श्री के प्रवचन सुनने के पश्चात मुनि श्री के पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद लिया। श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन पंचायत के पदाधिकारीओ द्वारा बैरवा का स्वागत अभिनंदन किया गया।
इस दौरान पंचायत अध्यक्ष विनोद पाटनी, दिलीप कासलीवाल, चेतनप्रकाश पांडया, मांगीलाल झांझरी,बाबू गदिया, गौरव पाटनी, पदम गंगवाल, मुकेश पाटनी, प्रदीप गंगवाल, मुकेश काला, जीतू पाटनी, चंद्र प्रकाश बैंद, महेंद्र पाटनी आदि उपस्थित रहे।

बीजाक्षर ध्यान प्रतिदिन करें*
मुनिश्री आदित्य सागरजी महाराज की प्रेरणा से विकसित बीजाक्षर आधारित ध्यान शिविर के दूसरे दिन शिवरार्थियों को बीजाक्षर व मंत्राक्ष के अक्षर लाभ के बारे में बताया गया। आरके कम्युनिटी सेंटर में आयोजित शिविर के दौरान मुनिश्री आदित्य सागर महाराज ने कहा कि ध्यान करने के बाद शरीर में ताजगी का अहसास होता है। पीठ को सीधे रखकर किए जाने वाले ध्यान से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक लाभ मिलने के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिदिन बीजाक्षर का ध्यान करने से मन को शांति और स्वास्थ्य बेहतर होगा। उन्होंने मेटिडेशन को जीवन की दिनचर्या बनाने पर जोर दिया। उन्होंने तनाव दूर करने और जीवन को रोग मुक्त करने के लिए तीन मंत्रों की महत्ता भी बताई।
प्रचार मंत्री गौरव पाटनी ने बताया कि शिविर में हेल्प इंप्रूवमेंट और बॉडी केयर रिलैक्सेशन,तनाव को दूर करने के लिए, तनाव मुक्त होने के लिए तीन ध्यान करवाए उन्होंने लाल वातावरण और बीजाअक्षर पीले रंग में
जं जं हं हं नमः जाप करने से तनाव एवं रोग दूर हो जाते हैं।
नील वातावरण में पीला
गं गं हं हं नमः जाप करने से पुरानी बीमारियां दूर हो जाती है
ओर तीसरा जब कवच के रूप में लाल रंग के वातावरण में पीला अक्षरों में
वं यं मं जाप करने से सुरक्षा कवच बन जाता है बीमारियां आसपास में भी नहीं आती है।
शिविरार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। ध्यान समाप्ति के बाद लगभग 20 से अधिक बीमारियों से ग्रसित शिविरार्थियों को उपचार बताए। मुनि श्री का उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा मनुष्य रोग मुक्त होकर सुखी जीवन जिए
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





