त्रिदिवसीय मंत्राक्ष ध्यान शिविर का शुभारंभ 1500 से अधिक शिविराथियों ने लिया लाभ, ठंड में श्वेत वस्त्र में सुबह 4:30 बजे से पहुंचे शिविर में
मदनगंज किशनगढ़।
मुनिश्री 108 आदित्य सागरजी महाराज की प्रेरणा से विकसित बीजाक्षर आधारित ध्यान शिविर का आरके कम्युनिटी सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय शिविर का शुभारंभ किया गया। मुनिश्री आदित्य सागर महाराज ने बताया कि मंत्र शिविर में भाग लेने से कई शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं, क्योंकि मंत्र जाप मन को शांत करने, तनाव कम करने और बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।
मंत्र शिविर में ध्यान करने से बहुत लाभ होते हैं। उन्होंने कहा कि तनाव और चिंता में कमी ही मंत्रों का लयबद्ध जाप शरीर की विश्राम प्रतिक्रिया को सक्रिय करता है। जिससे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर कम होता है। उन्होंने कहा कि मंत्र जाप के दौरान नियंत्रित और गहरी सांस लेने से हृदय गति और रक्तचाप नियंत्रित होता है। जो हृदय संबंधी स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। शांत मन और कम तनाव के कारण नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।

उन्होंने कहा कि मंत्र ध्यान में लीन होने के के पश्चात मनुष्य स्वयं के लिए जीता है उसको सर्दी ,गर्मी, बरसात का असर नहीं होता है वह केवल आत्मा में लीन रहता है उसे किसी प्रकार का सुख या दुख ध्यान के दौरान नहीं होता है।

प्रचार मंत्री गौरव पाटनी ने बताया कि आज की आधुनिक दुनिया की चकाचौंध से दूर मन की शांति के लिए मुनिश्री ने सेल्फ कंट्रोल करने के लिए बताया कि लाल एवं पीले अक्षरों में शं शं हं हं नमः मंत्र का जाप करने से मन शांत होता है। पीला एवं ऑरेंज कलर में वं वं हं हं नमः मंत्र का जाप करने से याद रखने में हमारी मदद करता है। हमारी यादव शक्ति को बढ़ाता है। पीले हरे रंग में ह्रीं ह्रीं ह्मः मंत्र का जाप करने से क्या सही है, क्या करने योग्य है, क्या नहीं करने योग्य होने का ज्ञान देता है। क्या सही है क्या गलत है इसका ज्ञान करवाता है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक दुनिया में बीजाक्षर आधारित ध्यान शिविर में तनाव से मुक्ति,जबरदस्त एकाग्रता, आत्म-शक्ति जागरण,बीजाक्षर ध्वनि की ऊर्जा अनुभव, आनंद की अनुभूति के लिए आदि का विकास शिविर के माध्यम से होगा।
पंचायत अध्यक्ष विनोद पाटनी ने बताया कि मुनि श्री द्वारा ध्यान मंत्र के माध्यम से अनेक बीमारियों का इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि छोटी से बड़ी सभी बीमारियों का मंत्राक्ष ध्यान से समाधान किया जाता है। साथ ही पाटनी ने अपील की अगर आपको भी कोई समस्या है तो आप शिविर में पहुंचकर मुनि श्री से संवाद का लाभ ले सकते है।
मेहनत ही भाग्य को आकार देता है।*
मुनि श्री आदित्य सागर
मुनिश्री आदित्यसागर महाराज ने शनिवार को आर के कम्युनिटी सेंटर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन की दो मुख्य अंग है एक भाग्य और दूसरा मेहनत ,
आप लोग किस पर विश्वास करते हो ,भाग्य पर जबकि विश्वास करना चाहिए मेहनत पर तुम्हारे पुरुषार्थ में वह ताकत है कि तुम कुछ भी कर सकते हो बस एक बार मन बनने की बात है पुरुषार्थ की
सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की सत्य और सत्यता का नाम है। आपका जो भी सौभाग्य और दुर्भाग्य आपको दिख रहा है। उन्होंने कहा कि आपकी आसक्ति है दुर्बलता का है नाम, सौभाग्य दुर्भाग्य कुछ नहीं होता है। भाग्य नाम की कोई वस्तु नहीं होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जो परिश्रम करता है वही सौभाग्य को प्राप्त होता है। आपका सौभाग्य ही परिश्रम को खींचकर लाता है। जो कुछ भी है सब पुरुषार्थ है, सब कुछ मेहनत है भाग्य कुछ नहीं है, मेहनत का चेंज किया हुआ फार्म है। उन्होंने कहा कि मेहनत वह शक्ति है जो हर सपने को हकीकत में बदल सकती है। यह वह ईंधन है जो हमें मुश्किल रास्तों पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। बिना मेहनत कुछ नहीं मिलता है, दुनिया में कोई भी बड़ी उपलब्धि बिना कठोर परिश्रम के हासिल नहीं हुई है। चाहे वह एक वैज्ञानिक का आविष्कार हो, एक खिलाड़ी की जीत हो, या एक छात्र की परीक्षा में सफलता हो, इन सबके पीछे अथक प्रयास और समर्पण होता है।
अक्सर लोग भाग्य की बात करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि भाग्य भी उन्हीं का साथ देता है जो मेहनत करने से नहीं कतराते। आपकी मेहनत ही आपके भाग्य को आकार देती है। मेहनत हमें आत्मनिर्भर बनाती है। जब हम अपनी क्षमताओं पर भरोसा करके काम करते हैं, तो हम न केवल अपनी चुनौतियों का सामना करते है। उन्होंने कहा कि मेहनत का मतलब यह नहीं कि हर बार सफलता ही मिले। कभी-कभी असफलता भी मिलती है। लेकिन जो लोग मेहनती होते हैं, वे हार से निराश नहीं है, मेहनत को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं।
उन्होंने कहा कि आज आपने जो मेहनत की है वह कल का भाग्य है, जो कल उदय में आएगा और जो आज उदय में कल की मेहनत है। मेहनत नहीं करोगे किस बात का भाग्य। इससे पूर्व सभा में चित्रअनावरण, दीपप्रज्जवलन, पादप्रक्षालन, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी नौरतमल राकेश कुमार विनय कुमार पाटनी परिवार बस्सी वाले व योगेश गदिया परिवार को मिला। मंगलाचरण अजीत बाकलीवाल ने किया। सायंकालीन श्रुत-समाधान एवं संगीतमय आरती की गई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312








