दीक्षा साधक के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है यह मात्र संस्कार नहीं बल्कि जीवन का अनुष्ठान है प्रमाण सागर महाराज
सिलवानी
दीक्षा लेना और देना एक दिन की घटना है,लेकिन उसे जीवनभर निभाना एक साधना है””दीक्षा साधक के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है,यह मात्र संस्कार नहीं बल्कि जीवन का अनुष्ठान है” उपरोक्त उदगार ज्येष्ठा मुनी श्री प्रमाणसागर महाराज ने पांचों क्षुल्लकों के दीक्षा दिवस पर सिलवानी में व्यक्त किये।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया दोपहर पश्चात मुनिसंघ का मंगलविहार सिलवानी से सियरमऊ की ओर हुआ 18 दिसंबर की आहार चर्या सियरमऊ में होगी।

दीक्षा दिवस पर संबोधित करते हुये मुनि श्री ने कहा कि जब कोई साधक दीक्षित होता हें तभी उसके जीवन की दिशा दशा निर्धारित होती है” यह मार्ग तीर्थंकरों ने प्रदान किया तथा आचार्य भगवंतों ने इस मार्ग को पल्लवित किया उन्होंने आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के प्रति सौभाग्य प्रकट करते हुये कहा कि हमें पूज्य गुरुदेव की शरण मिली और हम सभी उनसे दीक्षित हुये,आज के दिवस नेमावर में 21 क्षुल्लक दीक्षा संपन्न हुई थी जिन जिन को भी आचार्य गुरुदेव से दीक्षा मिली वह सभी बड़भागी है,और इसमें में भी शामिल हूं।
उन्होंने चार बातें दीक्षा के संदर्भ में कही दीक्षा लेना, देना,निभाना, तथा दीक्षा को सार्थक बनाना उन्होंने कहा कि “दीक्षा”एक घटना है,जब हमारे हृदय में वैराग्य उमड़ता है,तब किसी किसी के मन में ही दीक्षा लेने का भाव उत्पन्न होता है, गुरु शिष्य की पात्रता को देखता है,शास्त्रों में इसका पूर्ण विवेचन है लेकिन मेंने गुरुदेव को बहुत निकट से देखा है वह शास्त्रों के साथ साथ अपनी कसौटी पर कसकर ही दीक्षा देते थे उनके पास तो बहूत लंबी लाईन थी वह चाहते तो हजारों मुनि तैयार कर सकते थे,जो उनकी कसौटी पर जो खरे उतर गये समझ लैना उनके जीवन का उद्धार हो गया उन्होंने कहा कि जिस मकसद से आप सभी ने दीक्षा ली है,उस उद्देश्य को साकार करने का ही आपका लक्ष्य होंना चाहिये पूज्य गुरुदेव ने मेरे ऊपर विश्वास करके इन पांचों क्षुल्लकों को मेरे पास भेजा गुरुदेव ने तो 2019 में ही नेमावर में कह दिया था कि बाल ब्रह्मचारियो को तैयार करना है तथा उनके पालन पोषण का भी ध्यान रखना है।
क्षु.आदर्शसागरक्षु.समादरसागर,क्षु.चिद्रूपसागरक्षु.स्वभावसागर,क्षु.सुभगसागर जी को गुरुजी ने भेजा और संदेश दिया कि इनका पालन पोषण करना है,और हमने अपने तरीके से इन सभी को शिक्षा दीक्षा देने की कोशिश की है और मैं अपनी जिम्मेदारी की पूरी कोशिश कर रहा हूं,ब्र. शारांश और ब्र.रूपेश भी अच्छी साधना कर रहे है।
इस अवसर पर मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित सभी क्षुल्लकों ने भी संबोधन दिया।
कार्यक्रम का संचालन अशोकभैया ने किया प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के चित्र अनावरण एवं दीपप्रज्वलन से हुई।तत्पश्चात आचार्य श्री की पूजन अष्टदृव्यों से की गई इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य पांचों क्षुल्लक जी को मिला।तथा आचार्य गुरुदेव के चरणों का प्रछालन किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






