रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 91 सेनीचे, पर हमारी करेंसी डॉलर से 3% कम टूटी
रुपए ने मंगलवार को 36 पैसे गिरकर 91.14 का ऑल टाइम लो बनाया। चौथे दिन लगातार यह सबसे निचला स्तर है। बाद में डॉलर के मुकाबले 90.93 के निचले स्तर पर बंद हुआ। 2025 में अब तक भारतीय करेंसी में 6.3% गिरावट आ चुकी है। दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर इंडेक्स भी 9.5% टूट चुका है।
यानी हमारी करेंसी डॉलर से करीब 3% कम टूटी है। करेंसी मार्केट के एक्सपर्ट्स और अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, रुपया और डॉलर में एक साथ गिरावट कम ही देखी जाती है। लेकिन इस साल इसका कारण ट्रेड वॉर की मजबूरियां और। कुछ घरेलू वजहें हैं। भारत में रिजर्व बैंक रुपए को उतना सपोर्ट नहीं कर रहा है, जितना आम तौर पर देखा जाता है।
उधर अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड। ट्रम्प अर्थव्यवस्था में नकदी का स्तर बढ़ाने की मुहिम पर चल रहे हैं, जिससे डॉलर पर दबाव बनरहा है। बहरहाल, भारत में आम आदमी के लिए कमजोर रुपए का मतलब आम तौर पर ये होता। है कि पेट्रोलियम, खाने के तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे ऐसे सामान महंगे होंगे, जिन्हें दूसरे देशों से आयात किया जाता है। अच्छी बात ये है कि बीते। तीन महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 13-14% घट चुके हैं। इसके मुकाबले रुपए की कमजोरी मामूली है। यानी रुपया कमजोर होने। से पेट्रोलियम उत्पाद महंगे नहीं होंगे।कमजोर करेंसी ट्रेड वॉर का नया हथियार,कम महंगाई दर से भारत मजबूत स्थिति मे
•डॉलर, रुपया, दोनों कमजोर होने का क्या मतलब है?
भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ तेज। है, आर्थिक सुधार भी जारी हैं और। महंगाई कम है। दूसरी तरफ डॉलर खुद कमजोर हो रहा है। ऐसे हालात में रुपए में गिरावट कम ही देखने को मिलती है। पिछली बार 2013 में ऐसा हुआ था। ये एक नए आर्थिक। समीकरण का नतीजा है, जहां सभी बड़े देश अपने-अपने निर्यातकों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं।
रुपया कमजोर होने से रिजर्व बैंक क्यों परेशान नहीं दिख रहा?
आरबीआई रुपए में गिरावट रोकने का प्रयास कर रहा है और विफल हो रहा। है, ऐसा नहीं है। दरअसल रिजर्व बैंक रुपए को कमजोर होने दे रहा है क्योंकि इससे निर्यातकों को फायदा होगा। जिस देश की करेंसी कमजोर होती है वहां के निर्यातकों की आय बढ़। जाती है। भारत के मामले में डॉलर में। निर्यातकों की आय एक साल पहले के मुकाबले अब 6% ज्यादा होगी। गिरते रुपए से महंगाई बढ़ेगी? यही तो रिजर्व बैंक के लिए सबसे बड़ी सहूलियत है। रिटेल महंगाई कुछ माह से 1% से भी कम है। कमजोर रुपए के चलते ये 4% तक पहुंचे तो भी रिजर्व बैंक को दिक्कत नहीं आएगी।
डॉलर क्यों कमजोर हो रहा ?
ट्रम्प की वापसी से वहां राजनीतिक, आर्थिक और नीतिगत रिस्क बढ़े हैं। ये लगभग वैसा ही है, जैसा 2013 में भारत की स्थिति थी। ऐसे में ट्रम्प डॉलर की प्रिंटिंग बढ़ाकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं। ऐसा करने से डॉलर कमजोर हो रहा है, लेकिन इससे ट्रम्प को चिंता नहीं है। उन्हें लगता है कि इससे उनके निर्यातकों को फायदा होगा।








