शिक्षा का उद्देश्य अर्थोपार्जन नहीं ज्ञानार्जन भी होना चाहिए।सिद्ध चक्र मंडल विधान में योग सागर जी के मंगल प्रवचन
राघौगढ़ 11 दिसंबर।
धर्मनगरी राघौगढ़ में चल रहे श्री सिद्ध चक्र महा मंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवें दिन आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य ज्येष्ठ श्रेष्ठ निर्यापक मुनि योग सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में हम हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को भूल गए हैं। भारत में कान्वेंट प्राइवेट स्कूल खुल गए हैं जो शिक्षा के साथ-साथ धर्म परिवर्तन भी करा रहे हैं। शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य अर्थ उपार्जन हो गया है।
जबकि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञानार्जन एवं आध्यात्मिक की होना चाहिए। हमें ऐसी शिक्षा देना चाहिए जो नौकरी देकर गुलाम न बनाये बल्कि स्वावलंबी बनकर दूसरों को रोजगार दे। इसी भावना को ध्यान में रखकर आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज ने बालिकाओं को शिक्षित एवं सुसंस्कृत करने के उद्देश्य से देश में प्रतिभा स्थली की स्थापना की है। डोंगरगढ़, रामटेक, ललितपुर, जबलपुर एवं इंदौर, मैं प्रतिभास्थली की स्थापना की गई है।

प्रतिभास्थली में बालिकाओं को लौकिक शिक्षा देश की मातृभाषा हिंदी में दी जाती है उन्हें संस्कार मां बनाया जा रहा है।
संघस्थ मुनि निरामह सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा इस शदी के महान संत आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज की त्याग और तपस्या अनुकरणीय है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें उनका आशीर्वाद मिला है। प्रतिभास्थली इंदौर से आई ब्रह्मचारिणी सोनाली दीदी, ब्रह्मचारिणी अंजलि दीदी एवं ब्रह्मचारिणी आयुषी दीदी ने प्रतिभास्थली इंदौर जो की आचार्य गुरु विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से संचालित है इस कन्या आवासीय विद्यालय की विशेषताओं का विस्तार से उल्लेख किया और प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रतिभास्थली की शिक्षण आवास एवं भोजन व्यवस्था का प्रदर्शन किया। 
आपने समाज को आव्हान किया अपनी बालिकाओं को सुसंस्कारित बनाने उनका प्रवेश प्रतिभा स्थली में कराये। आपने कहा मुनि निर्लेप सागर जी महाराज जो कि राघौगढ़ नगर गौरव है उनके गृहस्थ जीवन के पिताजी अनिल कुमार रावत हमारे संरक्षक हैं इंदौर प्रतिभास्थली की सभी 45 दीदियां इन्हें पिताजी कह कर पुकारती है।
भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं जैन समाज ट्रस्ट कमेटी के मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य विजय कुमार जैन ने सिद्ध चक्र मंडल विधान के पांच में दोनों पांचवें दिन के धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया प्रातः 7:00 बजे से भगवान का अभिषेक शांति धारा एवं नव देवता पूजन हुई तत्पश्चात श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान की पूजन हुई एवं सिद्ध भगवान के गुणानुवाद करते हुए 256 अर्घ अर्पित किए गए। शाम 5:15 बजे उन्हें संघ के पावन सानिध्य में आचार्य भक्ति हुई रात्रि ठीक 7:30 बजे से आरती भक्ति हुई रात्रि 8:00 बजे बाल ब्रह्मचारी विज्ञानाचार्य पंडित संजीव भैया जी के निर्देशन में जैन समाज के 3 वर्ष से अधिक के अविवाहित बालक बालिकाओं के लिए संस्कार महोत्सव का आयोजन कर सुसंस्कार दिये गये।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




