ध्वजारोहण जिंदगी का सबसे बड़ा मंगलाचरण है, आनंद के अवसर हैं सुधा सागर महाराज शोभायात्रा के साथ निकली घटयात्रा, अयोध्या नगरी की रचना की, मंत्र उच्चारण से किया गया मंडप का शुद्धिकरण
अशोकनगर
नगर की कृषि उपज मंडी प्रांगण में पूज्य मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज सानिध्य में जिनेंद्र भगवान का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होने जा रहा है जिसका शुभारंभ मंगलवार की बेला में हो गया।
आयोजन के क्रम में मुनि संघ सन्निध्य में घट यात्रा शोभायात्रा निकाली गई जो मंडी स्थित बनाई गई अयोध्या नगरी में पहुंची जगह-जगह शोभायात्रा में रंगोली बनाई गई। सुभाष गंज से भगवान की रथयात्रा मुनिश्री सुधासागर के विशाल संघ के साथ चल रही थी। इस शोभायात्रा में सभी प्रमुख पात्र विभिन्न रथों पर चल रहे। थे। उनके पीछे विभिन्न मंडलों के मुनि संघ चल रहा था। रास्ते में भक्तों ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। यह शोभायात्रा मंडी स्थित अयोध्या नगरी पहुंची और वहां धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
श्रीमद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के सभी प्रमुख पात्रों को प्रतिष्ठा एवम सभी इन्द्रों की प्रतिष्ठा प्रदीप भया ने कराई इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पाषाण से भगवान बनने की क्रिया के रूप में हम श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महोत्सव मनाते आज आपको पात्र बनकरमहोत्सव करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
पात्र शुद्धि के साथ हुई इंद्र प्रतिष्ठा
आयोजन में पहले पात्र शुद्धि हुई। इसके बाद इंद्र प्रतिष्ठा के साथ विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। इस दौरान बताया गया कि अशोकनगर में 33 साल बाद इतना बड़ा आयोजन हो रहा है। समाजजन ने कहा कि आज की बहुत ही। शुभ घड़ी है, जब हम भगवान जिनेन्द्र देव का पंच कल्याणक महा महोत्सव मनाने जा रहे हैं। वर्षों की समाज की। तपस्या के बाद हमें भगवान का महा महोत्सव मना रहे हैं।
अपने जीवन को इतना अच्छा बनाओ,जिससे ये सृष्टि सुंदर हो जाए-मुनिश्री
धर्मसभा में संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि पंच कल्याणक महोत्सव आपके। जीवन का मंगल चरण करके आए। प्रकृति कहती है अपने जीवन को इतना अच्छा। बनाओ जिससे ये सृष्टि सुंदर हो जाए। प्रकृति कुछ भी नहीं है, निर्णय हमें करना है। इस को कितना मंगल बनना है। किंचित मात्र भी अमंगल नहीं होगा। प्रकृति मंगलाचरण नहीं कर सकती । प्रकृति कहती हैं कि तुम मंगलाचरण करो, तुम्हारे जीवन में मंगल ही मंगल हो । दुनिया की सोच, जहां समाप्त हो जाती है। वहां से सोच प्रारंभ होती है। मुनिश्री ने कहा कि दुनिया में दृश्य का महत्व है। वहीं हमारे यहां अदृश्य का महत्व है।
धन की खोज हमें करना नहीं पड़ती वह तो। धर्म का फल है। धर्म करना पड़ता है, जिससे धन मिलता है। धन धर्म के वृक्ष परलगा हुआ मीठा फल है। धर्म का मंगलाचरण करना होगा। कुबेर का भी खजानाखत्म हो जाता है, यदि उसमें नियमित वृद्धि ना की जाए। इसी प्रकार यदि श्रावक प्रतिदिन पुण्य की कमाई नहीं है तो कुबेर का खजाना भी खत्म हो जाएगा।
अशोकनगर में 33 साल पहले एक महा महोत्सव हुआ था।उसके बाद आज ये अवसर आया है जब आप सब भक्ति भाव से भगवान के पंचकल्याणक मना रहे हैं। ध्वजारोहण जिंदगीका सबसे बड़ा मंगला चरण है। आनंद केअवसर हैं पंचकल्याणक महोत्सव |
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312








