संसार में सभी प्राणी दुखी हैं वे सुख चाहते हैं मुनिश्री निर्मोह सागर जी

धर्म

संसार में सभी प्राणी दुखी हैं वे सुख चाहते हैं मुनिश्री निर्मोह सागर जी

राघौगढ़ 9 दिसंबर
प्राचीन ऐतिहासिक धर्म नगरी राघौगढ़ में संत सुधा सागर धाम स्थित संभवनाथ जिनालय परिसर में चल रहे श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के तीसरे दिन आज प्रातः 9:30 बजे आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि निर्मोह सागर जी ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा इस संसार में सभी प्राणी दुखी हैं और सब सुख चाहते हैं। हर प्राणी अपने दुखों से भयभीत है। आपने कहा पंडित दौलत राम जी कृत छहढ़ाला की प्रथम ढ़ाल में संसारी प्राणियों की दशा का विस्तार से उल्लेख किया है। मुनिराज जी ने कहा सुख दो प्रकार के होते हैं एक भौतिक सुख होता है। यह भौतिक सुख वह कहलाता है हम संसार में रहकर भोग विलास के साधन जुटा लेते हैं और इसे ही सुख मानने लगते हैं। भौतिक सुख से हमारा कल्याण नहीं होने वाला है। दूसरा सुख होता है आध्यात्मिक सुख। यह आध्यात्मिक सुख हमें भगवान की भक्ति एवं त्याग तपस्या से मिलता है। आध्यात्मिक सुख ही सच्चा सुख है।

 

 

मुनि निर्मोह सागर जी महाराज ने कहा आचार्य मानतुंग ने भक्तामर स्त्रोत के माध्यम से भगवान की सच्ची भक्ति की। उस भक्ति का प्रभाव हुआ कि एक के बाद एक 48 ताले खुलते चले गए। इसी प्रकार महारानी मैना सुंदरी ने श्री सिद्ध चक्र मंडल विधान के माध्यम से भगवान की भक्ति की उसका प्रभाव हुआ कि उनके पति महाराजा श्रीपाल का कुष्ठ रोग दूर हो गया। आपने यह भी कहा कि मैना सुंदरी ने एकमात्र अपने पति के स्वास्थ्य लाभ के लिए कामना नहीं की थी बल्कि सभी के लिए की थी। उसी का प्रभाव हुआ की 700 कुष्ठ रोगियों का रोग दूर हो गया।

 

विधानाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया जी ने कहा रावत परिवार राघोगढ़ के अनिल कुमार रावत एवं मीना रावत के इकलौते पुत्र अर्पित भैया जी ने लाखों की संपत्ति ठुकरा कर आत्म कल्याण के लिए मुनि दीक्षा लेकर अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त किया है। राघौगढ़ नगर गौरव मुनि निर्लेप सागर जी महाराज ने इस नगरी का गौरव बढ़ाया है।

 

 

 

 

भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं जैन समाज ट्रस्ट कमेटी के मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य विजय कुमार जैन ने बताया है सिद्ध चक्र महामंडल विधान में तीसरे दिन 9 दिसंबर को प्रातः 7:00 बजे से भगवान का अभिषेक शांति धारा हुई तत्पश्चात देव शास्त्र गुरु की पूजन संगीत के साथ हुई। प्रातः 9:00 बजे से ज्येष्ठ श्रेष्ठ मुनी योग सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान की पूजन हुई। पूजन में सिद्धों के 32 मूल गुण के 32 अर्घ श्रृद्धि सिद्धी मंत्रों के साथ भक्ति भाव से चढ़ाए गए ।तत्पश्चात मुनि निर्मोह सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन हुए। प्रातः 10:00 बजे से संगीतमय श्री भक्तामर महामंडल विधान बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया जी के कुशल निर्देशन में हुआ। आपने दिनांक 10 दिसंबर के धार्मिक आयोजनों की जानकारी देते हुए बताया प्रातः 7:00 बजे से भगवान का अभिषेक शांति धारा एवं नित्य नियम की पूजन होगी। तत्पश्चात मुनि संघ के सानिध्य में सिद्ध भगवान की 64 ऋद्धियों का वर्णन करते हुए 64 श्रृद्धि विधान के 64 अर्घ चढ़ाये जाएंगे। प्रातः 10:00 बजे से मुनिराज जी के मंगल प्रवचन होंगे। शाम 5:15 बजे मुनि संघ के पावन सानिध्य में आचार्य भक्ति होगी। रात्रि 7:20 बजे से संगीतमय भक्तांबर दीप प्रज्वलन एवं सामूहिक आरती होगी। रात्रि 8:00 बजे से बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया जी के मंगल प्रवचन होंगे।

 

 

श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान में भाग लेने गुना, रुठियाई, धरनावदा, आवन एनएफएल विजयपुर, साडा कॉलोनी, आरोन, कुंभराज, बीनागंज, जामनेर आदि के श्रद्धालु सैकड़ो की संख्या में प्रतिदिन राघौगढ़ आ रहे हैं और धर्म लाभ रहे हैं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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