जैन धर्म मरने की कला भी सिखाता है मुनि श्री निरोग सागर महाराज दिग्विजय सिंह का आया संदेश
राघौगढ़
जैन धर्म अद्वितीय एवम अलौकिक है, जो मनुष्य को केवल जीने की नहीं, बल्कि करने की भी कला सिखाता है। यह संसार असार है और मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होने के लिए त्याग और तपस्या आवश्यक है। उक्त उदार सोमवार को मुनि श्री 108 निरोग सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए जैन धर्म की महिमा को विस्तार से समझाया।
आपको बता दे नगर में धर्म प्रभावना के साथ चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के तीसरे दिन राघोगढ़ पूरी तरह धर्ममय वातावरण में डूबा रहा।
मुनि श्री निरोग सागर महाराज ने कहा कि फूस माह की कड़कती ठंड के बीच ऐतिहासिक नगरी राघोगढ़ में श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन और ज्येष्ठ श्रेष्ठ मुनि श्री 108 योग सागर महाराज का ससंघ सानिध्य नगर वासियों का महान सौभाग्य है।
महाराज श्री ने राघौगढ़ नगर गौरव मुनि श्री 108 निर्लेप सागर महाराज का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि वे आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित 130 वे मुनि है। जिन्होंने सांसारिक मोह माया को त्याग कर संयम मार्ग को अपनाया। उन्होंने कहा 10 दिसंबर को होने वाला 64 रिद्धि विधान भक्ति भाव पूर्वक संपन्न किया जाएगा। और सभी श्रद्धालु इसमें समर्पण भाव से सहभागी बने। इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनिश्री योग सागर ने भी अपने मंगल प्रवचन दिए उन्होंने धर्म साधना और आत्म कल्याण का मार्ग बताया।
दिग्विजय सिंह का मिला संदेश
इस पुनीत बेला में पूर्व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश एवं वर्तमान में राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह का संदेश प्राप्त हुआ उन्होंने वर्तमान समय में संसद सत्र चलने के कारण उपस्थित न होने के कारण खेद व्यक्त किया। एवम समस्त मुनि संघ के चरणों में नमोस्तु अर्पित किया।
बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया ने बताया कि 2 वर्ष पूर्व मुनि श्री 108 निर्लेप सागर महाराज ने अवगत कराया था कि उनके गृहस्थ जीवन के परिवारजन रावत परिवार आयोजन को राघोगढ़ में करना चाहते हैं। उन्होंने राघौगढ़ के नागरिकों की सराहना करते हुएकहा कि देश के अनेक स्थानों पर अनुष्ठान करते समय उन्हें ऐसी धर्मनिष्ठा कहीं देखने को नहीं मिली। जेसी राधौगढ़ को देखने को मिलती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






