अश्रु से झलकती आंखों से दी मुनि संघ को विदाईमुनि श्री दुर्लभ सागर का आरोन से हुआ मंगल विहार
आरोन।
आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं नव आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के परम् प्रभावक शिष्य वात्सल्य मूर्ति बीजाक्षर प्रणेता मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज का मंगल विहार सोमवार को हो गया।मंगल विहार से पूर्व मुनि श्री दुर्लभ सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित किया।
जैन समाज एवं चातुर्मास कमेटी द्वारा मुनि श्री आरोन में दो माह के लिए शीतकालीन वाचना का निवेदन भी किया। सायं को 4:30 बजे मुनि श्री दुर्लभ सागर एवं क्षुल्लक श्री निर्धूम सागर जी महाराज ने बड़ा जैन मन्दिर से पैदल विहार किया। जैसे ही नगर वासियों को मुनि संघ के विहार की सूचना प्राप्त हुई गुरु भक्त भी हजारों की संख्या में नम आंखों से विदाई देते हुए मुनि संघ के पैदल विहार में सम्मिलित हो गए।
इस अवसर पर बच्चे,युवा महिला,पुरुष सभी की आंखों में आंसू थे।पांच माह तक मुनि श्री का सानिध्य प्राप्त करने के बावजूद श्रावक दो माह तक और मुनि संघ के आरोन में ही रुकने का वार वार निवेदन कर रहे थे।
अद्वितीय रहा मुनि श्री का चातुर्मास एवं बर्षायोग
चातुर्मास कमेटी के प्रचार मंत्री सुनील झंडा ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत 7 जुलाई को मुनि संघ का नगर आगमन हुआ था एवं 13 जुलाई को मुनि संघ के चातुर्मास एवं बर्षायोग के मंगल कलश की स्थापना हुई थी। आरोन नगर में मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज के बर्षायोग एवं मंगल चातुर्मास काल के दौरान आरोन जैन समाज ने साधिका आश्रम का उद्घाटन,जैन गौशाला के मान स्तंभ में जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमाओं की स्थापना, पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में वेदी शिलान्यास,बड़ा जैन मन्दिर पर सुज्ञान जागृति पाठशाला के नवीन भवन का शिलान्यास,बड़ा जैन मन्दिर एवं शांतिनाथ मंदिर में अमृत कुंड निर्माण,वर्धमान कॉम्पलेक्स में सिद्ध चक्र 108 महामंडल विधान व रत्नत्रय दुर्लभ गाथा जैसे विशाल आयोजन एवं महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धियों को प्राप्त किया।
योग एवं ध्यान से आध्यात्मिक चेतना जागृत की* मुनि श्री दुर्लभ सागर महाराज प्रतिदिन प्रात: 5:30 बजे से योग ध्यान आसन एवं प्राणायाम की कक्षा के माध्यम से जन मानस में आध्यात्मिक की शिक्षा प्रदान करते थे।पांच माह तक श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों के सानिध्य में रहकर अपने भीतर आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया। मुनि श्री के योग एवं ध्यान के साथ साथ उनकी प्रेरणा से लगाया गया 8 दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का लाभ जैन अजैन सभी ने लिया।
मुनि श्री ने सिखाया क्रोध पर नियंत्रण करना
मुनि श्री द्वारा प्रतिदिन दिए जाने वाले मंगल प्रवचनों के माध्यम से जिन सरस्वती जैसे ग्रंथों के अध्ययन के साथ साथ लगातार 42 दिन तक क्रोध को दूर करने के भी उपाय बताए।मुनि श्री द्वारा क्रोध विषय पर दिए गए मार्गदर्शन का सैकड़ों लोगों ने लाभ उठाया और अपने क्रोध पर नियंत्रण स्थापित किया।
32 दिवसीय वैराग्य शिविर से दिखाई संयम की राह
मुनि श्री दुर्लभ सागर के द्वारा अगस्त माह से सितंबर माह तक 32 दिवसीय संवेग वैराग्य शिविर का भी आयोजन किया गया जिसमें मुनि श्री की प्रेरणा से सैकड़ों श्रावक श्राविकाओं ने 15 दिवसीय पंचम गुणस्थान व्रत को धारण करके जीवन में संयम के महत्व को भी समझा।
मुनि संघ के सानिध्य में ही अरनाथ भगवान का जन्मोत्सव एवं पहली बार चौबीसी बड़ा जैन मन्दिर की सभी 29 वेदियों पर विराजमान जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमाओं का भी एक साथ अभिषेक किया गया।
ग्राम उर्जनयाई में हुआ रात्रि विश्राम
मुनि संघ का रात्रि विश्राम आरोन से 5 किलोमीटर दूर सिरोंज रोड पर ग्राम उर्जनयाई में हुआ।जैन समाज अध्यक्ष विजय डोडिया,चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष श्री मिंटूलाल जैन, स्वागत अध्यक्ष मुनेश जैन बाख़र,मंत्री संजय जैन कंचू, सुनील चबूतरा,राजीव कांसल, प्रदीप सुनखेर,संजीव रामपुर,गोलू झंडा,संटू कांसल,मोनू भाईजी,निक्की गोयल,राकेश कालादेव,जैकी जैन केपी,मोनू पारस आदि उपस्थित थे।मंगलवार को मुनि श्री की आहार चर्या ग्राम हिनोतिया में हुई।
सुनील जैन झंडा आरोन से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




