शुद्ध वस्तुओं के स्थान पर रेडीमेड खाद्य पदार्थ ने घरों में स्थान बनाया है जिसके कारण नई नई बीमारियां ने जन्म लिया संभव सागर महाराज 

धर्म

शुद्ध वस्तुओं के स्थान पर रेडीमेड खाद्य पदार्थ ने घरों में स्थान बनाया है जिसके कारण नई नई बीमारियां ने जन्म लिया संभव सागर महाराज

विदिशा

आलस और प्रमाद के कारण घर की शुद्ध वस्तुओं के स्थान पर रेडीमेड खाद्यपदार्थों ने हमारे घरों में स्थान बना लिया है,जिससे नई नई बीमारियों ने जन्म लिया है,इससे धर्म तो नष्ट हो ही रहा है हमारा स्वास्थ भी खराब हो रहा है” उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण संभव सागर महाराज ने किरीमौहल्ला स्थित श्री महावीर जिनालय में व्यक्त किये।

 

 

 

 

 

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री संघ सहित किरीमौहल्ला स्थित श्री महावीर जिनालय पधारे और अभिषेक तथा शांतीधारा कराई।एवं मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने प्रवचन पर आधारित प्रश्न पूंछे एवं सही जबाब देने वालों को समाज द्वारा पुरस्कार प्रदान किये गये।

 

 

इस अवसर पर मुनि श्री ने सामाजिक व्यवस्थाओं पर प्रहार करते हुये कहा कि पहले जैनियों के यंहा पर अन्थऊ होती थी और आपके अजैन मित्र भी आपका ध्यान रखते थे तथा वह आपको अन्थऊ के समय पर आमंत्रित करते थे लेकिन आप लोग जब रात्रि में भोजन करने पहुंचने लगे तो उन्होंने भी आपका ध्यान रखना बंद कर दिया बल्कि यह देखने में यह आता है कि जैनी होकर के भी विवाह समारोह में सार्वजनिक रुप से रात्री में भोजन करते एवं कराते है, तो आप अपने ही धर्म की अप्रभावना कर रहे हो और खुद की भी हंसी उड़वा रहे हो।

 

 

धर्म की प्रभावना कर सको तो करना लेकिन ऐसा कार्य मत करना जिससे धर्म की अप्रभावना हो मुनिश्री

 

गुरुजी कहा करते थे कि

“धर्म की प्रभावना कर सको तो करना लेकिन ऐसा कोई कार्य मत करना जिससे धर्म की अप्रभावना हो” मुनि श्री ने कहा कि “यदि आप सार्वजनिक रुप से विवाह आदि कार्य में रात्री भोजन करते हो या कराते हो तो आप भगवान महावीर के मार्ग की अप्रभावना कर रहे है और इसमें जो आप बंध कर रहे है उससे आपके ही जैनत्व पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है,यदि आप जैन है,तो आपका रात्री भोजन का त्याग तो होना ही होना चाहिये जिससे जैन साहब की पहचान बनी रहे”उन्होंने कहा कि जंहा पहले शुद्ध भोजन और छना पानी का इस्तेमाल होता था वही आजकल की पीढ़ी अशुद्ध भोजन और अशुद्ध पानी का उपयोग करने में हिचकिचाते नहीं,आजकल आपके बच्चे और बडे़ भी उसमें शामिल है फास्टफूड का सेवन कर रहे है,रेडीमेड भोजन और ब्रेड पाव भाजी और न जाने आप लोग क्या क्या खाते रहते हो ये भोजन, ब्रेडऔर विस्कुट किस प्रकार किस पानी से बनते है ये कभी आपने देखा है? यदि नहीं देखा है तो एक बार जाकर जरुर देखिये यह किस प्रकार से फैक्ट्री में बनते है उसे देखना चाहिये जिससे आपको समझ आ सके कि ये पदार्थ हमारे खाने योग्य है या नहीं?आप देखोगे कि असंख्यात तिलूला जैसे जीव आपको मिल जाएगे।

 

एक और तो आप अहिंसा महावृत का पालन करने वाले गुरु को मानते है उनको आहार देते है, वही आप जमेंटो और कीवी जैसे बने बनाये अशुद्ध पदार्थों का सेवन करने लगे है यह तो आपको कभी करना ही नहीं चाहिये इसीलिये हम लोग जो बाजार का अशुद्ध भोजन करते है उनसे आहार नहीं लेते।उन्होंने बाजार का अशुद्ध भोजन तथा अशुद्ध जल की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करते हुये कहा कि यह आपके धर्म ध्यान में तो बाधक है ही आपके स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उचित नहीं जितना आप शुद्ध भोजन और पानी का ध्यान रखेंगे उतने ही आप स्वस्थ रहेंगे। मुनि श्री ने कहा कि रेडीमेड आटा और बेसन एवं मसाले में पीजरवेटिव (कीटनाशक)डाला जाता है जो कि हमारे स्वास्थ्य को नष्ट करता है।उन्होंने कहा कि शुद्ध पानी पिओ यह जो आप लोग फ्लास्टिक बोतल का पानी पीते हो वह नहीं पीना चाहिये।

 

 

 

 

 

मुनि श्री ने कहा कि यदि डिब्बे बंद खाद्य पदार्थों का सेवन करोगे तो आप उन त्रस जीवों को ही खा रहे हो?और अपने जैन धर्म से विमुख हो रहे हो मुनि श्री ने कहा कि अज्ञात भाव में यदि कोई कार्य किया जाता है तो कर्मबंध कम होता है,और ज्ञात होंने के पश्चात यदि आप वही कार्य करते हो तोकर्मबंध उतनी ही तेज गति से होता हैआप सभी तो ज्ञानी है एवं सभी चीजों के जानकार है फिर भी यदि उसी कार्य को करते है तो आप लोग अपने स्वास्थ्य के साथ तो खिलवाड कर ही रहे है बल्कि धर्म की भी अप्रभावना कर रहे है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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