एक माह के अंतराल के बाद नगर में खुशियों का सैलाब, दर्शनोदय तीर्थ से हुआ आगमन परम पूज्य सुधासागर महाराज का
अशोकनगर
जैन समाज के लिए मंगलवार का दिन मंगल ऐतिहासिक उत्साह और भक्ति से भरा रहा, जब परम पूज्य मुनिश्री सुधासागर जी महाराज का एक माह केदर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी प्रवास के बाद नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। दोपहर बाद जैसे ही परम पूज्य काफिला नगर सीमा पर पहुंचा। वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं और प्रमुख पदाधिकारियों ने जयकारों के साथ उनकी आगवानी की।
समाजजनों ने नगर के बाहर पहुंचकर मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर आगवानी की इसके बाद मुनिश्री की शोभायात्रा भक्ति के सैलाब में बदल गई। जहां भक्त नाचते-गाते और जयघोष करते हुए रहे थे। शोभायात्रा पार्श्वनाथ मंदिर, पछाड़ी खेड़ारोड, गांधी से होतेश्रद्धालुओं ने पलक पांवड़े बिछाकर और रंगोली। बनाकर स्वागत किया। शोभायात्रा का समापन सुभाषगंज में हुआ, जहां विशाल धर्म सभा का आयोजन किया गया। 


भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है ये सबको अपने में समाहित कर लेता है मुनि श्री
पूज्य मुनि श्री सुधासागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है कि भक्त को निर्णय करना है कि उसकाभगवान कैसा हो कल्पना आती है कि हमारा बेटा हो आपके मन में विचार आताकि आपकी बहु कैसी है आप मकान खरीदने पर विचार करते हैं मेरे पड़ोसी कैसा हो ऐसा ही आपको विचार करना है कि मेरा गुरु कैसा हो जो गुण तुम्हारे अंदर नहीं है वो गुरु होना चाहिए। मात्र संत शब्द से गुरु नहीं हो सकता। आचरण देखा जाता है श्री राम के नाम के साथ आचरण देखो सारी दुनिया श्री राम के आदर्श को अपनाने को तैयार रहते हैं।
एक प्रसंग आता है सीता जी कि कोई गलती नही थीं। मन से वचन से काय से किसी भी प्रकारसे कहीं गलती हो ही नहीं सकती थी।महासती सीता कहती हैं कि गलती मेरी है मैं इतनी सुंदर क्यों थी रावण की दृष्टि मेरे तरफ गई ये होती है महान व्यक्तित्व कीविशेषता | आपके परिणाम खराब होते हीनहीं कैसे होते हैं महासती सीता जी गलती नहीं होने पर भी अपनी गलती मान रहे हैं।
व्यक्ति विफल क्यों हो जाता है, समझें विफलता दिखा रही हैमुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति विफल क्यों हो जाता है समझें विफलता अज्ञानी व्यक्ति विफल इसलिए होता है क्योंकि वह सही तरीके से पुरुषार्थ नहीं करता पर निराश हो जाता है। वह हर किसी पर आरोप लगाने लगता है। आप जिस वस्तु को चाह रहे हैं वह नहीं मिली तो उसका आरोप किसी अन्य व्यक्ति पर लगा देते हैं तो आगे भी विफलहोंगे। यहां तक कि आप गाड़ी सावधानी से चला रहे थे कोई सामने आकर टकरा जाये। आपकी गाड़ी बड़ी थी वह आप को गालियां देगा। आपकी गलती नही है फिर भी आपनेशान्ति से सुन लिया तो शान्ति से सुनने का चमत्कार देना आगे आपको ऐसी कठिनाई नहीं देगी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

