आचार्य वर्धमान सागर महाराज को निवाई आगमन हेतु किया श्री फल भेंट मुनि प्रभव सागर महाराज के सानिध्य में हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम हम यह मानव पर्याय पाकर पृथ्वी पर भार नहीं उपहार बने – आर्यिका विलोक मति माताजी

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आचार्य वर्धमान सागर महाराज को निवाई आगमन हेतु किया श्री फल भेंट मुनि प्रभव सागर महाराज के सानिध्य में हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम हम यह मानव पर्याय पाकर पृथ्वी पर भार नहीं उपहार बने – आर्यिका विलोक मति माताजी

निवाई – सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में सन्त निवास नसियां जैन मंदिर में बुधवार को शीतकालीन प्रवास के दौरान आर्यिका विलोक मति माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम यह मानव पर्याय पाकर पृथ्वी पर भार नहीं उपहार बने। परन्तु सांसारिक सुख कहां स्थाई रहने वाले हैं। इस जगत में तो सुख और दुख रुप दो धाराएं अविरल प्रवाहित होती रहती है और मानव सुख दुख रुप हिंडोले में झूलता रहता है। आर्यिका विलोक मति माताजी ने कहा कि जिनके पास न विधा है न तपस्या करते हैं न संयम का पालन करते हैं अपना और अपने बच्चों का पेट भरने पालन पोषण करने में ही अपना धन व्यय कर देते हैं। दान नहीं देते, एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए तत्पर नहीं रहते, शील का पालन नहीं करते, धर्माचरण में लीन नहीं रहते और सद्गुणो की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील नहीं होते हैं वे इस मृत्युलोक में पृथ्वी पर भार स्वरूप है। उन्होंने कहा कि जिस दिन भी आयु का तांता टूट जाएगा विश्व की कोई भी शक्ति हमारी रक्षा करने में समर्थ नहीं हो सकेगी। अतः आने के बाद और जाने से पूर्व ऐसा कार्य कर जाए कि हम भार नहीं, किन्तु समाज व देश के लिए उपहार बन जाए। तभी नर पर्याय की सार्थकता है। आर्यिका विलोक मति माताजी ने निवाई में विराजमान आर्यिका शीतल मति माताजी की चल रही संल्लेखना पर विस्तार से जानकारी दी।

 

 

 

 

 

धर्म सभा से पूर्व मंगलाचरण करने का सौभाग्य जैन धर्म प्रचारक विमल पाटनी एवं विमल सोगानी को मिला।

इस दौरान मूलनायक भगवान शांतिनाथ जी के समक्ष दीप प्रज्वलित हुकमचंद जैन शंभु कठमाणा सन्मति चंवरिया पवन बोहरा एवं सुनील गिन्दोडी ने किया। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के आशीर्वाद से जैन नसियां संत निवास पर मुनि प्रभव सागर महाराज के सानिध्य में श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिदिन भगवान की शांतिधारा करके देव शास्त्र गुरु की पूजा अर्चना की जा रही है। इस दौरान वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज संध को निवाई आगमन हेतु शीतकालीन प्रवास के लिए जयधोष के साथ श्री फल भेंट किया गया। इस अवसर पर सांयकाल भगवान शांतिनाथ जी की महाआरती के साथ आर्यिका महायश मति माताजी आर्यिका दिव्ययश मति माताजी एवं आर्यिका पद्यय यश मति माताजी के द्वारा आनन्द यात्रा के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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