अच्छे कर्म का फल सुखदायी होता है: आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी
हिंडौली
आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में कल्पद्रुम महामंडलविधान हुआ। विधान के छठे दिनसुबह की मंगल बेला में गुरु मां के सानिध्य में जिन अभिषेक सहस्त्रनाम की शांतिधारा करने का सौभाग्य 8 परिवारों को मिला। इसके बाद जहाजपुर से आए समाजजन ने गुरु मां का पाद प्रक्षालन किया।बूंदी से आए अध्यक्ष महेंद्र जैन व मनीष जैन द्वारा शास्त्र भेट की गई।कलकत्ता से आए समाजजन ने दीप प्रज्ज्वलन की क्रिया पूरी की।
समोशरण में गुरु मां ने विराजमान होकरअपने दिव्य वचनों से समाज को लाभान्वित किया। गुरु मां ने कहा कि हमेशा अच्छे कार्य में योगदान दें, किसी का बुरा न सोचें और न करें।संस्कारों से जीवन जीते हैं और इन्हीं संस्कारों को आने वाली पीढ़ी सीखती हमेशा सुखदायी होता है।


इसलिए हमें अच्छे कर्म, श्रेष्ठ कर्म, उत्तम कर्म,
जिसमें आत्मा को सुख हो, आत्मा कीमुक्ति हो और सर्वजन के लिए
हितकारी हो, ऐसा श्रेष्ठ कर्म सदैव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि
अच्छे-बुरे कर्मों का फल तुम्हें स्वयं ही मिलेगा। अच्छे कर्मों का परिणाम अच्छा ही होता है और बुरे कर्मों का परिणाम बुरा ही होता है। व्यवहारिक दृष्टि से भी कोई मनुष्य मदिरा पीने का कर्म करता है
तो मंदिरा पीने का परिणाम मिलता है सब कर्मों का अपना स्वभाव है

किसी के बारे में गलत सोचना भी पाप है
माताजी ने कहा कि सिर्फ मन से ही व्यक्ति कई प्रकार के पाप करता है।किसी के बारे में गलत सोचना भीपाप है। सोचने से दूसरे का बुरा तो नहीं होता, लेकिन स्वयं का जरूर कुछ न कुछ अहित हो जाता है। इसलिए हमें कभी भी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचना चाहिए। इसलिए जब भी सोचो चाहे अपने लिए या फिर दूसरों के लिए सभी के लिए अच्छा सोचो।
उन्होंने कहा हर व्यक्ति को भगवान की वंदना जरूर करना चाहिए। इससे उसके दिनभर के पाप कम हो जाते हैं। कहा कि विधान तो
बहुत बार किए पर क्या कभी आपने अपने जीवन का कोई संविधान
बनाया है। नहीं बनाया तो पहलेजीवन की आचार संहिता बनाई,
जिससे जीवन विनाश की तरफ न जाकर विकास की तरफ जाए
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

