निर्यापक मुनि श्री समय सागर महाराज सानिध्य में हुआ पशु चिकित्सालय का लोकार्पण अहिंसा धर्म विश्वव्यापी परोपकार, दया, करुणा, अनुकंपा लेकर आया है समय सागर महाराज

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निर्यापक मुनि श्री समय सागर महाराज सानिध्य में हुआ पशु चिकित्सालय का लोकार्पण अहिंसा धर्म विश्वव्यापी परोपकार, दया, करुणा, अनुकंपा लेकर आया है समय सागर महाराज
तेंदूखेड़ा
पशुपालन मंत्री लखन लाल पटेल, सांसद प्रत्याशी राहुल लोधी, पूर्व ऊर्जा मंत्री दशरथ सिंह लोधी, भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारीयो की मौजूदगी में महाराज श्री के सानिध्य में गौशाला में पशु चिकित्सालय का लोकार्पण किया गया।

 

 

 

 

 

 

 

 

इस दौरान दयोदय गौशाला के अध्यक्ष संजय पारसमणि का स्वागत किया गया। 

इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनिश्री समयसागर महाराज ने कहा की अहिंसा धर्म का हम व्याख्यान नहीं कर पाएंगे क्योंकी अहिंसा धर्म बहुत व्यापक धर्म है। यह अहिंसा धर्म जैनियों का है, ऐसा नहीं है। यह धर्म विश्वव्यापी, करुणा, दया अनुकंपा को लेकर आया है। पवित्र आत्मगत से परिणाम उत्पन्न होते हैं जिसका नाम अहिंसा धर्म है।

महाराज श्री ने कहा कि मानव अपने आप की रक्षा की बात तो करता है, उसके जीवन में प्रतिकूलता आती है, कोई संकट आता है तो, उसे दूर करने के लिए सभी प्रकार से तत्पर हो जाता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को सुखमय बनाने का प्रयास करता है, पुरुषार्थ कर अपने जीवन का यापन करता है।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा की किंतु पशु क्या करेगा वह मुक प्राणी है। कोई पालन करता है तो उसे खाद्य वस्तु मिलती है। लेकिन जो आवारा पशु घूम रहे हैं, उनकी रक्षा, उनके जीवन के लिए सोचने वाला कौन मिलता है। ऐसे पशुओ की सेवा करने वाले कितने लोग हैं। मानव अपने लिए हर प्रकार का प्रबंध करता है, लेकिन पशुओं के लिए क्या प्रबंध है। गाय को सूखा भूसा मिल जाता है तो उसे चाव से खा लेती है। उसके बदले में गाय आपको दूध देती है। दूध से घी आदि अनेक वस्तु बनती है। जिससे आपका जीवन पुष्ट हो जाता है। उसी घी से भगवान और गुरु की आरती उतारी जाती है।

 

महाराज जी ने कहा कि गुरु महाराज जी कहते हैं कि पशु का पालन आप नहीं कर रहे, पशु आपका पालन कर रहे हैं। बच्चों का पालन भी गाय के दूध से ही होता है। पहले कृषि पशुओं के माध्यम से ही होती थी। जिस कारण पशुओं का पालन होता था। लेकिन अब मशीनों से हो रही है। नीति न्याय के अनुरूप नित्य का अर्जन करते है, उस नित्य का प्रतिशत वह पशुओ के पालन वह पशुओं के पालन करने में लगाते है तो निश्चित रूप से जो पशुओं के लिए आपके द्वारा जो सुख शांति मिली है, संभव है कि वह भव भव आपको याद रखेगा। करुणा, दया, अनुकंपा के साथ बिना स्वार्थ की अहिंसा धर्म का पालन करेंगे तो आपका भविष्य उज्जवल होगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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