पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल का 81 वर्ष की उम्र में हुआ निधन
कानपुर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। 81 वर्षीय जायसवाल ने कानपुर के पोखरपुर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिवारजन उन्हें हृदय रोग संस्थान ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल पहुंचते ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।
श्री जायसवाल कानपुर से तीन बार सांसद रहे । उन्होंने कानपुर में कांग्रेस को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एक नजर जायसवाल के सफर पर
कांग्रेस में 1999 से 2014 तक कद्दावर नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले 81 वर्षीय श्रीप्रकाश जायसवाल 1989 में मेयर बने थे। उस समय सभासद मेयर का चुनाव करते थे। वह 1999 में भाजपा सांसद जगतवीर सिंह द्रोण को हराकर पहली बार कानपुर लोकसभा सीट से सांसद बने थे। इसके बाद अगले ही वर्ष चार दिसंबर 2000 को सलमान खुर्शीद को हटाकर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
श्री जायसवाल तीन जुलाई 2002 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। 2004 में हुए लोकसभा चुनाव से उनकी राजनीति में और चमक आई। वह 23 मई 2004 को केंद्रीय गृह मंत्री बनाए गए। इसके बाद तीसरी बार वह 2009 में जीते तो उन्हें कोयला राज्यमंत्री बनाया गया। वह 26 मई 2014 तक इस पद पर रहे। इस समय तक श्रीप्रकाश जायसवाल का पद बहुत बड़ा हो चुका था और वह भाजपा की ओर से मैदान में उतरे सतीश महाना और सत्यदेव पचौरी दोनों को हरा चुके थे।
आखिरकार 2014 में भाजपा को अपने पूर्व राष्ट्रीय डा. मुरली मनोहर जोशी को उन्हें हराने के लिए मैदान में उतारना पड़ा। श्रीप्रकाश जायसवाल 2014 का चुनाव हार गए। इसके बाद 2019 में सत्यदेव पचौरी ने उन्हें पराजित किया। वह 2024 का चुनाव नहीं लड़े और उनकी जगह आलोक मिश्रा को टिकट दिया गया। 25 सितंबर 1944 को जन्मे श्रीप्रकाश जायसवाल ने डीएवी कालेज से पढ़ाई की। उन्होंने कानपुर को श्रम शक्ति, उद्योग नगरी जैसी ट्रेनें दी। इसके साथ ही सीओडी पुल भी उन्हीं की देन है।
कोरोना काल से बिगड़ी तबियत, अब पहचानने में हो रही थी मुश्किल
पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री, गृह राज्यमंत्री व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे श्रीप्रकाश जायसवाल के निधन से कांग्रेसियों में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने कानपुर में कांग्रेस को काफी मजबूत स्थित में लाकर खड़ा किया था। न सिर्फ संगठन को मजबूत बनाया बल्कि मंत्री रहते शहर को कई योजनाएं दी। उन्होंने कानपुर से नई दिल्ली तक श्रम शक्ति एक्सप्रेस का परिचालन कराया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व राजीव गांधी के करीबी रहे श्रीप्रकाश को 2014 में भाजपा के डा. मुरली मनोहर जोशी के सामने हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद फिर वह 2019 में भी कांग्रेस के टिकट पर कानपुर से चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं सके थे। 2020 में कोरोना काल के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। वर्तमान में लोगों को पहचानने में भी उन्हें दिक्कत होने लगी थी।






