संसार में एक भी स्थान नहीं जहां सिर्फ धर्मात्मा रह सकें, पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है मुनि श्री सुधासागर महाराज 

धर्म

संसार में एक भी स्थान नहीं जहां सिर्फ धर्मात्मा रह सकें, पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है मुनि श्री सुधासागर महाराज 

अशोकनगर

इस संसार में एक भी स्थान नहीं है जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे, पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों तरफ पापियों का राज्य है ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता । प्रकृति ने धर्मात्माओं के लिए कोई स्थान सुरक्षित किया ही नहीं।

 

 

 

उक्त धर्म उपदेश मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने दर्शनोदय तीर्थ थूबोन जी में धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिए।उन्होंने कहा कि संसार ऐसा ही है जब किसी को संत बनने की प्रेरणा देते हैं तो सब असार बताते हैं। संसार में कुछ नहीं रखा सब छोड़ दें भक्त ने वैराग्य धारण कर लिया फिर गुरु मौन हो गये। जय श्री राम हो गया अब तो सिर्फ मौन हो गये दुनिया में कैसे जीना है इसकी कला सिखाई गई है।

 

कदम चले कदम चिट्ठे कदम भूंजे जा भांजे में कैसे चलू कैसे खाऊं कैसे रहूं ये सब मैंकुछ करूंगा मुझे पाप का बंध नहीं होना चाहिए। कीचड़ में तो रहूंगा लेकिन जंग नहीं लगना चाहिए। दुनिया में यदि खोटा है तो चोखा होगा ही होगा : दुनिया में यदि खोटा है तो चोखा होगा ही होगा। अपन कहें इतने साल धर्म करते हुए हो गए। कोई शान्ति नहीं मिली वर्षों से मंदिर जा रहे हैं कुछ नहीं हुआ। गुरुओं के पास गया कुछ भी नहीं मिला तो भी थकना नहीं है कितना ही थक जाओ थककर बैठना नहीं है फिर उठो और खोज करने में लग जाओ।

 

एक संकल्प कर लो मैं सत्य को खोजकर रहूंगा। हीरा कहां मिलता है कोयला की खान से निकाला जाता है जहां काला ही काला कोयला भरा पड़ा है उसके बीच में एक दम चमक दार हीरा मिला। वहसबसे अच्छा माना जाता है ऐसा सब चीजों में समझना।

संसार में सबसे गंदा शरीर मनुष्य का होता है जहां भगवान बनने वाली आत्मा रहती है उन्होंने कहा कि ये शरीर कैसा है इस शरीर में मल मूत्र भरा पड़ा है। कैसे गन्दे स्थान पर आत्मा को रख दिया। सबसे अच्छा शरीर देवताओं का होता है और संसार में सबसे गंदाशरीर मनुष्य का होता है। लकड़ी जल कोयला भई कोयलाजल भई राख राख से जग अपनी गंदगी को दूर कर लेता है। इसमें आत्मा को रखा गया जो भगवान बन सकती हैं। इसके लिए खोज जारी रखना पड़ेगा हम धर्म करते हुए थक रहे हैं।दया करने में थक गए हिंसा करने वाले भी सुबह उठते ही फिर युद्ध करने चले जाते हैं। तुम धर्म करते करते थक गए। नहीं थकना नहीं हम एक जीव को भी नहीं बचा पाए तो भी नहीं थकेंगे।

पारसनाथ स्वामी अवधि ज्ञानी थे सब जानते थे ये नाग नागिन इतने जल चुके थे कि ये बचेंगे नहीं। फिर भी बचाने में लगे रहे। डॉक्टरों को भी यही कह गया अंतिम श्वास तक प्रयास करता रहता है। यदि डॉक्टर एक मिनट पहले भीमरीज को भगा दे तो एफआईआर हो सकती है। डॉ अंतिम समय तक प्रयास करता रहता है इसलिए हमें थकान नहीं है।

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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