बचे हुए पैसे को धर्म कार्य में लगाकर यशकीर्ति अर्जित करें: मुनिश्री सुधासागर महाराज
अशोकनगर
दर्शनोदय तीर्थ थूबोन जी में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में रोजाना धार्मिक आयोजन चल रहे हैं। सोमवार को मंदिर में नव दीक्षित साधुओं की आहार चर्या को देखनेके लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। मंदिर में सुबह धर्मसभा का आयोजन किया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने
कहा कि बचे हुए पैसे को धर्म कार्य में लगा कर यश कीर्ति अर्जित करें।ये जो पैसा बचा है जो किसी ना किसी धर्म के वृक्ष पर लगा हुआ फल है। बचे हुए पैसे से पाप मत करना वो तुम्हारे महान पुण्य का फल है। 

ये तुम्हारे जन्म-जन्म के पुण्य का फल है। मेरे भक्त के पास पैसा बढ़ता है मेरे भक्त का व्यापार बढ़ता है तो मेरा सीना छप्पन इंच का हो जाता है। ये जन्म जन्म का पुण्यात्मा है तो आज सम्पन्नता की जिंदगी जी रहे। अब आपको आगे इसे आगे बनाये रखने के लिए सतत् पुरुषार्थ करते रहना चाहिए।


डाकू और साधु की एक ही जाति है
मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि डाकू और साधु की एक ही जाति है। डाकू को पता चले कि सेठ परमाल है। ऐसे ही साधु को पता चले तो वह उसे दान के लिए प्रेरित करने लगता है। साधु सोचते हैं कि मेरा भक्त इतना पुण्य आत्मा है सब कुछ करके भी दो पैसे बचे हैं तो आगे भी उसका भला होता रहे। इसलिए उसको दानकी प्रेरणा दे देता हैं।
तुम्हें दुखी देखा नहीं कि मैं दुखी हो जाता हूं
मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि तुम्हें दुखी देखा नहीं कि मैं दुखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो मेरा भक्त होकर गरीब है। भगवान इसकी कैसे भी गरीबी दूर करो। कुछ तो पुण्य का उदय रहता है कि छोटा सा बालक है अभी तो गोदी में ही है और उसे महाराज के दर्शन करने तुम लेकर आ गए तो मैं बहुत खुश होता हु सोचता हूं कि ये जन्म जन्म का धर्मात्मा है अभी पैदा ही हुआ है और परिवार वाले तीर्थ क्षेत्र केदर्शन कराने ले आये। गुरु महाराज के चरणों मेंलाकर समर्पित कर दिया ऐसा सहयोग भी बहुत पुण्य के योग से मिलता है। धर्म कराने के तरीके हैं जिस जिस के दान के पीछे पडूं तो समझ लेनाकि उसका पैसा पुण्य के उदय से आया है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




