धर्म रथ दोनों पहियों के सहारे आगे बढ़ता है: मुनिश्री योगसागर महाराज

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धर्म रथ दोनों पहियों के सहारे आगे बढ़ता है: मुनिश्री योगसागर महाराज
| गुना

शहर के बूढ़े बालाजी रोड स्थित गौशाला परिसर में आयोजित दस दिवसीय इंद्रध्वज महामंडल विधान का समापन गुरुवार को विश्व शांति के साथ हुआ। हवन कुंड में आहुतियां देकर श्रद्धालुओं ने धर्म शांति और कल्याण की कामना की।इससे पूर्व निर्यापक मुनि श्री योग सागर महाराज के ससंघ के सानिध्य में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा और पूजन संपन्नहुए। विधान में इंद्र-इंद्राणी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ब्रह्मचारी धीरज भैया के निर्देशन में पारंपरिक विधि-विधान के साथ हवन मेंसहभागिता की। इसके बाद श्रीजी का पैदल विहार पाश्र्वनाथ बड़े जैन मंदिर तक हुआ।

 

 

इस अवसर पर मुनि श्री योग सागर महाराज ने कहा कि जो मन औरइंद्रियों पर विजय प्राप्त करता है, वही सच्चा जैन कहलाता है। उन्होंने बताया कि धर्म रूपी रथ श्रावक और मुनिराज दोनों पहियों के सहारे ही आगे बढ़ता है। 28 मूल गुणों का पालन, तप, ध्यानऔर अहिंसा की साधना से ही वीतरागीमुनियों का मार्ग प्रशस्त होता है। गुनावासियों को आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा कि जो सर्वनाम को अपनाता है, मुनिश्री ने संयम, तप और अहिंसा का महत्व बताया

 

उपदेश में मुनि श्री योग सागर महाराज ने कहा कि सच्चा जैन वहीहै जो 28 मूल गुणों का पालन करता है, इंद्रियों को वश में रखता है और निरंतर तप व ध्यान में लीन रहता है। उसका नाम अपने आप प्रतिष्ठित हो उन्होंने कहा कि परिग्रह त्याग, अहिंसा जाता है।और सदाचार का पालन मनुष्य को वीतरागी संतों के मार्ग के करीब ले जाता है। जीवन में विवेक, श्रद्धा और क्रियाशीलता से ही धर्म साधना। संभव होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे मन के विकारोंपर नियंत्रण रखते हुए अपने जीवन को संयम और शांति की दिशा में आगे बढ़ाएं।

इस बेला में  ऐलक श्री तन्मय सागर महाराज ने प्रारंभ से अंत तक गुरुकृपा का वर्णन किया और मुनि श्री योग सागर से समाधि पर्यंत आशीर्वाद की कामना की। 21 नवंबर को वीरेन्द्र लोक में शिक्षा मंदिर का शिलान्यास तथा22-23 नवंबर को ऋषभायतन नसिया में वार्षिक रथोत्सव आयोजित होगा।

        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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