आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संघ एवम आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर महाराज का भव्य मिलन
रामगंजमंडी
हाड़ौती की पावन धरा पर विगत चार पांच माह से धर्म की गंगा में डुबकी लगा रही थी। एक और जहां कोटा की धरा पर आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज एवं आर्यिका 105 विभा श्री माताजी का वर्षायोग संपन्न हुआ वहीं पिडावा भवानी मंडी स्थान पर भी वर्षायोग हुए।
वही हाडोती की प्रसिद्ध नगरी रामगंज मंडी भी पीछे नहीं रही यहां पर वाककेसरी संत आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का वर्षायोग ऐतिहासिक एवं भव्य रूप से संपन्न हुआ आचार्यश्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने 14 नवंबर को नगर से मंगल विहार किया वही वही 16 नवंबर की संध्या बेला एक नया अध्याय लिख गई जो युगों युगों तक याद किया जाएगा।
संध्या की बेला में परम पूज्य पर्यावरण संरक्षक तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज संघ सहित कोटा से बिहार करते हुए स गुरु धाम तीर्थ पर पहुंचे और आधा घंटा पूर्व पहुंचकर तीर्थ के बाहर खड़े होकर परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संघ की अगवानी में पलक पांवड़े बिछाकर खड़े रहे जो उनका वात्सल्य समर्पण परिलक्षित कर रहा था। 

भाव विहल कर देने वाले पल
जैसे ही आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संघ सहित गुरु धाम तीर्थ के बाहर पहुंचे उस समय का नजर बहुत ही दिव्य एवं अलौकिक था। परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज आचार्य श्री के चरणों में बड़े ही वात्सल्य भाव के साथ नतमस्तक हो गए और गदगद हो उठे वे अपने आप में बहुत ही भाव विहल थे जैसे ही आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने आचार्य श्री के चरणों में नमन किया परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने उन्हें गले से लगा लिया निश्चित रूप से ज्ञान की दो धाराओं का महा मिलन महा समागम अपने आप में एक इतिहास लिख गया समस्त संघ ने परस्पर एक दूसरे से प्रति नमोस्तु करते हुए नमन किया यह मिलन वात्सल्य अंग का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है इन पलों में जय जयकार का शोर गुरु के आने से जैसे भजनों के द्वारा जो क्षण दिख रहे थे। वह किसी अविस्मरणीय से कम नहीं थे।
रामगंजमंडी नगर से बिहार में सम्मिलित हर्षित जैन, कमल लुहाड़िया, भूपेंद्र जैन, महेश कटारिया आदि ने बताया की आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर महाराज ने हाडोती में गुरुदेव की प्रेरणा से बनने जा रहे तीर्थ गुरु धाम तीर्थ पर चलने का निवेदन किया लेकिन गुरुदेव ने मुस्कुराते हुए उनके निवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि भविष्य में फिर कभी आऊंगा उन्होंने कहा कि अभी मुझे दिल्ली की और जाना है। सचमुच दोनों आचार्य का वात्सल्य देखते हुए बनता था। यही कहा जा सकता है कि हाडोती के इतिहास में धर्म अध्याय में एक और स्वर्णिम क्षण आज जुड़ गया जो सदा सदा अविस्मरणीय और अक्षुण्ण रहेगा।



इस अभूतपूर्व अवसर पर गुरुदेव के अनन्य भक्त गुरु धाम तीर्थ के प्रमुख श्री लोकेश जैन सीसवाली, श्री विनोद जैन टोरडी, प्रकाश जैन बज, कपिल जैन आगम,मिथुन मित्तल, पारस साहू मौजूद रहे। आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का रात्रि विश्राम अंकलक स्कूल में हुआ सोमवार की बेला में आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन समारोह गुरु धाम तीर्थ पर संपन्न होगा।
साधुओं का मिलना ही चमत्कार मानता हूं आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज
इस अभूतपूर्व बेला में आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि मेरा गुरुदेव से बहुत पुराना वात्सल्य है आचार्य श्री का सानिध्य तपोभूमि में हुए पंचकल्याणक में मिला इसी वर्ष में आचार्य श्री से मिलन तपोभूमि, मोडी और अब गुरुधाम में मिलन हुआ। एक साल में चार बार मिलना चार और चमत्कार साधुओं का मिलना ही चमत्कार मानता हूं। साधुओं का समागम करना साधुओं का समादर करना हमारे खून में है। समाज को मेरे प्रवचन याद नहीं रहते हम दोनों मिले यह याद रहता है। यह मिलन संदेश देता है कि दोनों साधु मिलकर एक साथ बैठे है प्रवचन करते है उसी तरह एक भाई दो भाई चार भाई एक साथ मिलकर रहे।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312




