अरबों काम छोड़कर भगवान के दर्शन करो स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी के सानिध्य में अतिशय क्षेत्र पर कल्पद्रुम महामंडल विधान चल रहा है जो भक्ति भाव के साथ हो रहा है।
गुरुवार की बेला में माताजी ने पूजन भक्ति मंदिर जाने एवं दान करने के साथ त्याग करने की प्रेरणा दी। पूज्य माताजी ने विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि हम पूजा पाठ स्वाध्याय आदि ये सभी धार्मिक क्रियाएं कर रहे हैं इन सबका एक ही उद्देश्य है अशुद्धि से दूर होना विशुद्धि को प्राप्त करना!
विशुद्धि में आनंद है जहां पर राग द्वेष कम होता है जहाँ कषाएं कम होती हैं जहाँ मोह कम होता है जहाँ जाकर पाप कम हो जाते है!
जब कम में इतना आनंद है तो त्याग में कितना आनंद होगा? जब त्याग में इतना आनंद है तो जिनका पूर्ण रूप से छूट चुका है उनको कितना आनंद मिल रहा होगा! जो समवशरण में विराजमान हैं हम
उनकी पूजा करने आते हैं कि भगवान जैसे आप बने हो मैं भी आपके जैसा बन जाऊं! देव त्रियंच आदि में एक प्रमुख होता है मनुष्यों में
जैसे राजा होता है यथा राजा तथा प्रजा जैसा राजा होता है वैसी प्रजा होती है!
माताजी ने कहा अगर राजा धार्मिक है तो प्रजा धर्मी होती है! हमे मंदिर प्रतिदिन आना चाहिए! सौ काम छोड़कर दान करो हजार काम छोड़कर ध्यान करो करोड़ काम छोड़कर पूजा करो और अरबों काम छोड़कर भगवान के दर्शन करो!

चेतन जैन पाटन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
