आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में हुआ पंचकल्याणक महोत्सव मोक्षकल्याणक महोत्सव के साथ भव्यता के साथ हुआ सम्पन्न
रामगंजमंडी
नगर के इतिहास का तीसरा अवसर था जब पंचकल्याणक महोत्सव हुआ हो आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संघ सानिध्य एवम प्रतिष्ठाचार्य श्री नमन भैया, पंडित जयकुमार जैन, पंडित श्री सुलभ जैन शास्त्री एवम आकाश जैन आचार्य के निर्देशन यह महोत्सव सम्पन्न हुआ सभी ने पाषाण से भगवान बनने की क्रिया को देखा जाना सभी ने अपने आपको धन्य माना और पुण्य अर्जन किया
महोत्सव की विशेष बात
इस महोत्सव की विशेष बात यह रही पूर्व मे जो पंचकल्याणक महोत्सव हुए उसमें बने मुख्य पात्र युवा बने यह महोत्सव धर्म जागृति के साथ युवा शक्ति में धर्म की अलख का एक पर्याय बना
महोत्सव के अंतिम दिन प्रातः बेला में मोक्ष कल्याणक महोत्सव हुआ और प्रभु ने मोक्ष को प्राप्त किया आदि प्रभु ने कैलाश पर्वत पर योग निरोध धारण करके कर्मों का क्षय मोक्ष को प्राप्त किया। मोक्ष उपरांत नख एवम केशो को सोधर्म इंद्र द्वारा चरण चिन्ह मोक्ष स्थली पर स्थापित किए गए एवम अग्नि कुमार देवो द्वारा नख एवम केशो का अग्नि विसर्जन किया
इस बेला में आचार्य श्री ने मोक्षकल्याण बारे में बताया उन्होंने कहा कि जैनत्व के बिना कर्म क्षय का मार्ग नहीं खुलता पंचम काल में तो मुश्किल है। लोभ लालसा भी होनी चाहिए। कर्म क्षय और मोक्षमार्ग की यह बात समझ में आती है हृदय तक पहुंचती है तो हमारा काम बनता है
दोपहर की बेला में हुआ पिच्छिका परिवर्तन
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संघ का पिच्छिका परिवर्तन हुआ इस क्रम में भक्ति भाव के साथ विशेष थाल सजाकर भक्ति भाव के साथ अष्ट द्रव्य से पूजन किया गया इस क्रम में आनवीं सुरलाया, रुचि टोंग्या हाटपिपल्या ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी इसके साथ आरवी
सबदरा ने नृत्य की प्रस्तुति दी सभी भक्ति नृत्य करते हुए गुरुदेव के चरणों में पिच्छिका भेट कर रहे थे एवम पुरानी पिच्छिका प्राप्त कर रहे थे। कार्यक्रम का निर्देशन मुनि श्री 108 प्रांजल सागर महाराज ने किया।

इन्हें मिला पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का सौभाग्य
संयम व्रत धारण करने वाले पुण्यशाली परिवार को नवीन पिच्छिका भेट करने एवं पुरानी पिच्छिका प्राप्त हुई आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज की पुरानी पिच्छिका श्रीमान नितिन कल्पना सबदरा को प्राप्त हुई मुनि श्री 108 प्रांजल सागर महाराज की पुरानी पिच्छिका प्रदीप संगीता विनायका प्रत्यक्ष सागर महाराज की देवेंद्र मीनाक्षी टोंग्या प्रमेश सागर महाराज की प्रदीप कुमार चंदना लुहाड़िया रामगंजमंडी को प्राप्त हुई।इस अवसर पर समाज की ओर से सभी का सम्मान किया गया।


आचार्य श्री को वात्सल्यमना की उपाधि से किया गया सुशोभित सकल दिगंबर जैन समाज राम के जी मंडी की ओर से आचार्य श्री को वात्सल्यमना की उपाधि से सुशोभित किया गया यह उपाधि समाज की ओर से संरक्षक अजीत सेठी अध्यक्ष दिलीप विनायका उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया उपाध्यक्ष कमल लुहाड़िया मंत्री राजीव बाकलीवाल महावीर मंदिर अध्यक्ष महेंद्र ठोरा महामंत्री पदम सुरलाया, मयंक सांवला, महेश कटारिया आदि ने प्रदान की
आचार्य श्री ने पिच्छिका का स्वरूप बताया कि पिच्छिका निर्ग्रंथ का स्वरूप है इसके बिना वह निर्ग्रंथ नहीं हो सकता दिगंबर मुद्रा को ऐसे ही कोई नमन नहीं करता उसके हाथ में पिच्छिका होनी चाहिए यह अनिवार्य है यह संयम का बड़ा उपकरण हैं।
जैन दर्शन के विषय में कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य जीवो का संरक्षण करना है । संयम उपकरण मयूर पिच्छिका मयूर पंखे से बनती है जब जब मयूर को पंख कष्ट देने वाले हो जाते हैं होगा उसका त्याग करते हैं और साधु उनका संरक्षण कर लेता है।
भावों को शुद्ध करने से ही मन शुद्ध होता है लक्ष्य भावों का होना चाहिए आचार्य श्री ने कहा दिगंबर मुद्रा का आधार पिच्छि होता है दिगम्बरत्व बगैर पीछी के नहीं हो सकता।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312




