राजा श्रेयांश एवम राजा सोम के यहां हुए आहार के साथ भगवान को हुआ केवल ज्ञान ज्ञान का कार्य है जानना विश्वास करना श्रद्धान का काम है आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में हो रहे पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन भगवान का केवलज्ञान प्राप्त हुआ।
केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव की बेला में प्रतिदिन की भाती श्री जी का अभिषेक शांतिधारा हुई इस बेला में आचार्य श्री ने ज्ञान के विषय में प्रकाश डाला आचार्य श्री ने कहा कि ज्ञान का कार्य जानना और विश्वास करना श्रद्धा का काम है जानी हुई वस्तु पर श्रद्धा कैसा है विश्वास कैसा है इसे ही लाभ प्राप्त होता है। सोने का उदाहरण देते हुए कहा कि सोनी को जानना और उसे पर श्रद्धा करना होता है। सुनार भी उसे कसौटी पर कसता है पीतल कितनी वस्तु है उस पर श्रद्धान नहीं करता कोई भी निर्णय श्रद्धा के बाद होता है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धान ज्ञान में बड़ी भूमिका निभाता है सही जगह श्रद्धान होना चाहिए मेहनत परिश्रम तप साधना करते हैं तब जाकर पुण्य प्राप्त होता हैं इसका मतलब तब जाकर केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है। झोली फैलाओ और शुभ भावनाओ भाओ की केवलज्ञान की प्राप्ति हो। यदि यह हो जाएगा तो कल्याण निश्चित है।
राजा सोम राजा श्रेयांश परिवार के यहां हुए आदिनाथ प्रभु के आहार
इसी क्रम में एक वर्ष तक आदिनाथ प्रभु को विधि नहीं मिली और किसी को नवधा भक्ति विधि आहार की विधि भी नहीं पता थी और आहार चर्या का सौभाग्य राजा सोम राजा श्रेयांश परिवार को मिला जो श्री संजय ममता बाक़लीवाल एवम राजीव मनीषा बाकलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ इसी के साथ प्रभु की दिव्य ध्वनि खिरी प्रभु को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई। और प्रभु का पारणा गन्ने ईक्षु रस गन्ने से हुआ 


दोपहर की बेला में समवशरण की रचना हुई समवशरण के प्रथम दर्शन कराने एवम विमोचन करने का सौभाग्य कमल कुमार उमा देवी शामगढ़ निवासी को प्राप्त हुआ एवं इन्हीं के परिवार को ही समवशरण की प्रथम आरती का सौभाग्य मिला। समवशरण दिव्य उपदेश हुआ आचार्य श्री ने द्रव्यों के वर्णन को बताया उन्होंने कहा कि संसार में 6 द्रव्य है जिसमें जीव चेतन है उसे अनुभूति है उसे सुख दुख का अनुभव है। 

उन्होंने बताया कि भगवान ने दो धर्म का प्रतिपादन किया श्रावक धर्म और मुनि धर्म भगवान ने हमें महाव्रत धारण करके तप साधना का मार्ग बताया श्रावक के छह आवश्यक आठ मुलगुणों का पालन करने के साथ व्यसन त्याग का विस्तृत वर्णन किया।
भगवान ने आचार्य के 36 मूलगुण उपाध्याय के 25 मूलगुणों का मार्ग बताया जन्म जरा मृत्यु पर्याय तक हमारी है कर्म बंधन के कारण जीव कभी मनुष्य कभी देव कभी नरक पर्याय में जन्म लेता है।
भगवान की दिव्यध्वनि सर्वांग से खिरती है
आचार्य श्री ने भगवान की दिव्य ध्वनि के विषय में सभी को बताया उन्होंने कहा जब दिव्या ध्वनि खिर रही थी संपूर्ण संसार में मेघ गर्जन प्रचारित हो रही थी। उन्होंने कहा दिव्य ध्वनि जिनेंद्र वाणी है जो सर्वांग से खिरती है। भगवान ने दिव्य ध्वनि के माध्यम से आगम को समझाया केवल ज्ञान की महिमा अनंत है केवलज्ञानी अनंत पर्याय को देखता है यह केवल ज्ञान की महिमा है। सम्पूर्ण कार्यक्रम में छायाचित्र में सक्रिय सहयोग आशु जैन कटनी, सन्नी जैन कटनी एवम उनकी टीम ने विशेष सहयोग किया
बुधवार को होगा पिच्छिका परिवर्तन एवम मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312


