पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया कोई भी कार्य करने से पहले अभ्यास करना होता है आचार्य श्री

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पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया कोई भी कार्य करने से पहले अभ्यास करना होता है आचार्य श्री
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया इसमें सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक शांति धारा उपरांत पूजन जन्म कल्याणक की हवन आदि किया गया उसके उपरांत आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का मंगल प्रवचन हुआ आचार्य श्री ने कहा कि कोई भी कार्य करने से पहले अभ्यास करना होता है अभ्यास बहुत जरूरी है व्यक्ति चतुर तो बनता है लेकिन अभ्यास नहीं करता है तो वह फेल हो जाता है फेल हो जाने के बाद वह परेशान और पछताता है।

 

 

 

कार्य से ज्यादा अभ्यास में परिश्रम होता है
आचार्य श्री ने कहा कि कोई कार्य में कार्य से ज्यादा अभ्यास में परिश्रम होता है यदि अभ्यास होता है तो कार्य में परेशानी नहीं आती।

दिगंबर मुद्रा का अभ्यास केशलोच से शुरू होता है
उन्होंने कहा कि दिगंबर मुद्रा का अभ्यास केशलोच से शुरू होता है शरीर टेंपरेरी व्यवस्था है आज है वह कल नहीं रहेगा। दिगंबर मुद्रा में सबसे पहले अभ्यास कराया जाता है और सबसे पहले केशलोच कराया जाता है। उन्होंने मनुष्य के विषय में कहा कि मनुष्य में विशेषता होती है कि वह जैसा चाहे वैसा परिवर्तन कर सकता है अच्छे को बुरा कर सकता है और बुरे को अच्छा कर सकता है अभ्यास के द्वारा कुछ भी संभव हो सकता है।

उन्होंने कहा की लौकिक कार्यों का तो भरपूर अभ्यास करते हैं लेकिन हमें आध्यात्मिक की ओर भी अभ्यास शुरू करना चाहिए पूजा पाठ अनुष्ठान से धर्म और अध्यात्म का विकास है।

अध्यात्म में हमें वस्तु स्वरूप को जानना होगा और उसमें आनंद उठाना होगा अध्यात्म को समझते हुए यदि हम वस्तु स्वरूप को नहीं समझेंगे तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

 

 

 

धर्म में जिसकी जितनी आस्था और ताकत है वह उसे उतना ही लूट सकता है धार्मिक अनुष्ठानों में लूटोगे तो पुण्य होगा

 

संस्कार और संस्कृति के विषय में बोलते हुए गुरुदेव ने कहा कि संस्कार और संस्कृति अच्छी होती है तो पढ़ाव भी अच्छा होता है यदि यह अच्छा नहीं है तो पढ़ाव भी अच्छा नहीं होगा थोड़ा सा बदलना है अध्यात्म से जुड़े महामंत्र से जोड़े मंत्र वाक्य से जोड़ेंगे तो मैं लिख कर देता हूं कि अपन स्वर्ग में मिलेंगे।

ब्रह्मचारी नमन भया के निर्देशन में
दोपहरमें विनायक यंत्र पूजनराजकुमार आदिकुमार का विवाह हुआ जिसमें आदिकुमार की बारात निकाली गई जिसमें उत्साह भरपूर दिखा बग्गी में भगवान के माता पिता बने सुधा जयकुमार डूंगरवाल, सोधर्म इंद्र इंद्राणी मयंक विजया सांवला, कुबेर इंद्र मनीष सिंघल बैठे हुए थे
32000 मुकुटबद्ध राजाओं के द्वारा भेट समर्पण, राज्याभिषेक आदि हुआ साथ ही भरत बाहुबली संवाद हुआ। राज्यसभा में भगवान आदिनाथ ने सभी को आसि मसी कृषि का संदेश दिया अपनी दोनों पुत्री ब्राह्मी सुंदरी को शिक्षा प्रदान की

इसी क्रम में तीर्थंकर आदिनाथ का राज्याभिषेक हुआ।राज्य सभा में जैसे ही नीलांजना नृत्य हुआ राजकुमार आदिनाथ को वैराग्य हो गया और वह दीक्षा लेने चले गए उसे समय का क्षण काफी भावुक था इसी क्रम में आचार्य श्री के सानिध्य में
दीक्षाभिषेक दीक्षा विधि सम्पन्न हुई और प्रतिमाओं पर दीक्षा विधि के संस्कार किए गए। आचार्य श्री ने भी तप कल्याणक का महत्व समझाया

एक दिन पूर्व जन्म कल्याणक की रात्रि में बेला में तीर्थंकर बालक का जन्म कल्याणक मनाते हुए पालना झुलाया गया एवम बाल क्रीड़ा की गई
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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