धर्म व वैराग्य का संगम साथ मुमुक्षुओं ने क्षमा मांगते हुए त्यागा संसार आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज के कर कमलों से हुई सात दीक्षा 

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धर्म व वैराग्य का संगम साथ मुमुक्षुओं ने क्षमा मांगते हुए त्यागा संसार आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज के कर कमलों से हुई सात दीक्षा

जयपुर

गुलाबी नगरी की धरा पर सात संत संघों की 38 पिच्छिकाओ के सानिध्य में सांगानेर चित्रकूट कॉलोनी कवरकर बाग में सोमवार को आचार्य श्री 108 सुंदर सागर महाराज के कर कमलो से साथ जैनेश्वरी दीक्षा हुई।

 

 

 

इन दीक्षाओ में 24 वर्ष के युवाओं से लेकर 75 वर्ष की उम्र के सात मुमुक्षु दीक्षित हुए। इसमें तीन श्राविकाए एवम 4 मुमुक्षु श्रावकों को दीक्षा प्रदान की गई। दीक्षा से पूर्व प्रातः बेला में दीक्षार्थियों द्वारा केशलोचन किया गया। जो जैन दर्शन में कठिन तपस्या माना जाता है। इसके उपरांत ही दीक्षा दी जाती है।

 

प्रातः बेला में श्री जी के अभिषेक पूजन उपरांत दीक्षा स्थल के लिए दीक्षार्थियों की बैंड बाजा के साथ शोभा यात्रा निकाली गई। दीक्षा स्थल पर आचार्य श्री 108 सुंदर सागर महाराज ने विधि विधान के साथ सभी दीक्षार्थियों की दीक्षा संस्कार किए सभी दीक्षार्थियों ने सभी से अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना की क्षमा याचना करते हुए आचार्य श्री से सभी दीक्षार्थियों ने आचार्य श्री से दीक्षा हेतु निवेदन किया।

नंगी तलवार पर चलना सरल, लेकिन दिगंबर वेष धारण कर मोक्ष मार्ग पर चलना कठिन आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज

आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज ने इस अवसर पर कहा कि नंगी तलवार पर चलना सरल है, लेकिन

जेनेश्वरी दीक्षा लेकर दिगंबर वेश धारण कर मोक्ष मार्ग पर चलना कठिन है। समस्त क्रियाओं को करते हुए दीक्षार्थियों का पंचमुष्टि केशलोच किया गया। आचार्य श्री के श्री मुख से शांति मंत्र के जाप करने के बाद सभी के मस्तक पर गंधोदक क्षेपन किया गया। एवं वर्धमान मंत्र के बाद मस्तक पर श्रीकार लेखन किया गया। हाथ में श्री लेखन कर अक्षत श्रीफल सुपारी आदि से संस्कार किए गए।

 

 

नामकरण संस्कार में दिए गए नए नाम

उत्तर प्रदेश एटा निवासी दीक्षार्थी भया विकास जैन को मुनि श्री 108 सुयोग सागर नाम दिया गया। सागवाड़ा राजस्थान निवासी उमंग जैनको मुनि श्री 108 श्रुतांश सागर महाराज नाम दिया गया। पंकज जैन को मुनि श्री 108 सुधैर्य सागर महाराज नाम दिया गया भीलवाड़ा निवासी श्री प्रकाश जैन को क्षुल्लक श्री 105 सुधीर सागर नाम दिया गया।

 

 

वही दीक्षार्थी महाराष्ट्र निवासी किरण देवी को आर्यिका 105 सुस्थिर मति माताजी, माधोराजपुरा की श्री मंजू देवी जैन को क्षुल्लिका 105 सुस्थित मति माताजी एवं मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ की नक्षी देवी को क्षुल्लिका 105 सुस्थानमति माताजी नाम दिया गया। अंत में सभी सभी नव दीक्षित संतो को पुण्यशाली परिवार द्वारा पिछी कमंडल एवं जाप माला प्रदान की गई।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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