पापी से नहीं पाप से घृणा करो प्रमाण सागर महाराज 

धर्म

पापी से नहीं पाप से घृणा करो प्रमाण सागर महाराज

भोपाल

“पापी से नहीं पाप से घृणा करो,व्यक्ति से नहीं व्यक्ती के अंदर की उन दुर्बलताओं को देखो,कि कही वो दुर्बलताएं मेरे अंदर तो नहीं” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने विद्याप्रमाणगुरुकुलम् में नये वर्ष वीर निर्वाण सम्वत् 2052 पर व्यक्त किये,

 

 

 

 मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाशजैन विद्यावाणी ने बताया कि विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गुणायतन गौरव के कार्यक्रम संपन्न होंने जा रहे है,जो शिक्षा,समाज और साधना के उपक्रम को पूर्ण करेंगे, सात नवंबर को आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज का आचार्य पदारोहण दिवस है,उनकी स्मृति को चिरस्थाई बनाये रखने के लिये भोपाल में ऐतिहासिक धरोहर की शुरूआत विद्याप्रमाण गुरुकुलम्”भवन का शिलान्यास अंतरराष्ट्रीय विभूति शिकागो (अमेरिका) के डा.दीपक जैन की विशेष उपस्थिति में होगा तथा शंकासमाधान के माध्यम से “समाज के युवक युवतियाँ किस प्रकार अपने वीजन को आगे बढ़ाए”विशेष मार्गदर्शन एवं 8 नवम्वर शनिवार को गुणायतन का अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन जिसमें देश एवं विदेश से गुणायतन के सभी सदस्य आमंत्रित है,इसी के साथ 9 नवम्वर रविवार को भोपाल चातुर्मास का अंतिम कार्यक्रम”पिच्छिका परिवर्तन” दोपहर एक बजे से प्रारंभ होगा विद्याप्रमाण गुरुकुलम् टीम,चातुर्मास चकृवर्ती, सभी नवरत्न परिवार एवं गुणायतन भोपाल के सभी कार्यकर्ताओं ने संपूर्ण भारत के धर्म श्रद्धालुओं को इस अवसर पर आमंत्रित करते हुये कार्यक्रम में पधारने का निवेदन किया है।

 

 

 

 

भगवान महावीर के 2051 वर्ष व्यतीत हो जाने के पश्चात नये संवत्सरी वर्ष पर मुनि श्री ने कहा कि”भगवान” को छोड़कर इस संसार में कोई दूसरा प्राणी ऐसा नहीं जिसमें गुण ही गुण हों, अवगुण न हों मुनि श्री ने कहा कि हम सभी सांसारिक प्राणी है सभी में”दुर्बलताएं” है, किसी में कुछ कम है,तो किसी में कुछ ज्यादा तो फिर हम अवगुणों के स्थान पर उसके गुण देखने का प्रयास क्यों नहीं करते? यदि हम उसके अंदर के गुणों को देखेंगे तो हम समाज के लिये उस व्यक्ती का अच्छा उपयोग कर सकते है,उन्होंने एकघटना का उल्लेख करते हुये कहा एक स्थान पर हम थे और एक दबंग व्यक्ति ने धर्म और धर्मात्माओं पर अभ्रद टिप्पणी कर दी उसे समाज में बड़ी प्रतिक्रिया हुई लेकिन किसी ने हिम्मत स

आगे बढ़कर उस दबंग व्यक्ती से बात करने की नहीं की,ऐसे समय समाज का ही एक व्यक्ती जो कि दबंग था लेकिन वह कभी मंदिर और गुरुओं के पास नहीं आता था लेकिन धर्म और गुरुओं के प्रति श्रद्धा थी वह व्यक्ति उस दबंग व्यक्ति के पास जाकर भिड़ गया तुमने जैन धर्म और जैन गुरूओं के प्रति यह टिप्पणी कैसे कर दी?तुम्हें अपने शब्द वापिस लेना होंगे,उस व्यक्ति से लिखित में माफी मंगवाई।

 

 

 

 

मुनि श्री ने कहा बोलो जो काम अच्छे अच्छे धर्मात्मा नहीं कर पा रहे थे वह कार्य उस व्यक्ती ने कर दिखाया, कहावत है कि “कभी कभी खोटा सिक्का भी काम में आता है” इसलिये किसी को भी खोटा मत कहो, लेकिन आप लोग तो खरे सिक्का को भी खोटा साबित करने में लगे रहते हो, किसी भी व्यक्ती के प्रति कोई पूर्वाग्रह मत बनाइये उसे समझने की कोशिश कीजिये यदि उसके अंदर कोई बुराई है,तो उसे समझने की कोशिश करो,आपकी दृष्टि सकारात्मक होगी तो आप बुराई में भी अच्छाई को देख लेंगे, सोच नकारात्मक रखोगे तो आपको अपने बच्चे में भी बुराइयां नजर आएगी और सकारात्मक होगी तो हर व्यक्ति में अच्छाई नजर आएगी घटनाओं से सबक सीखो न कि उसकी आलोचना करो।

 

 

 

 

इस अवसर पर मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक महाराज मंचासीन थे।कार्यक्रम का संचालन अभय भैयाआदित्य ने किया प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन एवं मुनि श्री का पाद प्रक्षालन इंदौर से पधारे जैन समाज के श्री भरत मोदी एवं कुसुम मोदी परिवार ने तथा 2024 चातुर्मास के मुख्य यजमान विजय पाटौदी ने किया इस अवसर पर बड़ी संख्या में इंदौर भोपाल के श्रद्धालु उपस्थित थे।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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