लोकोदय तीर्थ नही बनवा रहा हु तुम्हे विष्टा का कीड़ा बनने से बचा रहा हु सुधासागर महाराज

धर्म

लोकोदय तीर्थ नही बनवा रहा हु तुम्हे विष्टा का कीड़ा बनने से बचा रहा हु सुधासागर महाराज
आगरा
मथुरा नेशनल हाईवे स्थित अंतरराष्ट्रीय लोकोदय तीर्थ की भूमि पर आगरा नगर के इतिहास में पहली बार 24 समवशरण श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान का आयोजन चल रहा है। जहां प्रत्येक दिन लगभग दो हज़ार इन्द्र-इन्द्राणियां और अन्य भक्त इस मांगलिक विधान में सहभागिता करने के उद्देश्य से प्रतिदिन विधान स्थल पर आ रहे हैं।

 

 

 

जनवरी के पहले हफ्ते की ठिठुरती ठंड में यूं तो सूरज देवता की चमक फीकी है| जहां विधान के चौथे दिन 04 जनवरी को सभी इन्द्र- इन्द्रणियों ने भव्य 24 समवशरण के समक्ष बाल ब्रह्ममचारी प्रदीप भैय्या सुयश के कुशल निर्देशन में मंत्रोच्चारण के साथ श्रीजी के समक्ष अर्घ्य अर्पित कर विधान की क्रियाएं सम्पन्न कीं|

 

 

 

निर्यापक मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज एवं क्षुल्लकश्री गम्भीरसागर जी महाराज के सानिध्य में 1 जनवरी से निरन्तर चल रहे 24 समवशरण श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान के दौरान प्रांगण का वातावरण अत्यंत रमणीय होता है।

 

विधान के मध्य में मुनिश्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कभी भी सपने में भी एक बार भाव आ जाये कि माँ बाप ने हमें क्या दिया है, समझ लेना तुमने जितना विकास किया है साँप सीढ़ी के समान आखिरी खाने से नीचे के खाने में आ जाओगे तुरन्त। जिसने तुम्हे जन्म दिया है वो कितना भी निकृष्ट हो जाये, तुम्हे खाने को भी न देवे, एक कोड़ी भी न देवे तो भी कभी ये मत बोलना, मत सोचना कि मुझे मेरे माँ-बाप ने क्या दिया है, यदि इतना भी मन मे विचार आ गया समझ लेना तुम्हारी यह कृतघ्नता पूरी जिंदगी को शून्य पे ला देगी। यह मत समझना कि तुम आज धनवान हो, आज तुम सुखी हो तो कल भी रहोगे, निरन्तर सावधानी की जरूरत है, तुम कहो कि हमे पुण्य कमाने की जरूरत क्या है, हमारे पास तो बहुत पुण्य है, एक क्षण में सारा पुण्य खत्म हो सकता है, ये मत समझना कि हमारे पास इतना है तो पूरी जिंदगी निकाल लेंगे, एक क्षण लगेगा कुछ नही बचेगा।

 

 

तुम्हारा पुण्य सोने के समान है और साधु का पुण्य पारस पत्थर के समान है जिसे लोहा छुए तो वो सोना बन जाये। जो कुछ नही लेता है उसे ही सबकुछ देना है, जो हमे आँख उठाकर नही देखता है, नासा दृष्टि किये है, उसे हमे आँख फाड़कर देखना है। जो किसी से कुछ नही बोलता, हमे उससे ही बोलना है, जो किसी को कुछ नही देता, वही से हमे सबकुछ लेना है।

 

जब पाप करने की ताकत है तब पाप को छोड़ो, जब धर्म करने की ताकत है तब धर्म करो, जब दान देने की ताकत है तब दान दो। जैनी का धन महत्वपूर्ण है, एक जुआरी का नही, जैनी के धन से यदि गलत हो गया तो जैनी को माफ नहीं किया जाएगा, सीधा भिखारी बनेगा क्योंकि जैनी का धन था, अच्छा था। जैनी का धन कभी बुरा नही होता। जैनी का कुछ भी बुरा नहीं, सब कुछ अच्छा होता है| लोकोदय तीर्थ नही बनवा रहा हूँ, तुम्हे विष्टा का कीड़ा होने से बचा रहा हूँ, पाप करते समय सोचो कोई काम नही आएगा, तुम्हारा कमाया हुआ कुछ काम नही आना है, बेटे की किस्मत बेटे की है, तुम्हारी किस्मत तुम्हारी है। भरत चक्रवर्ती का चक्ररत्न उसके बेटे के काम नही आया। पुण्यवान बेटा वह है जो बाप के मकान में जन्म लेता है और पुण्यवान बाप वह है जो बेटे के मकान में मरता है। जितने बड़े राजा महाराजा हुए उन्होंने उसे कभी मरघट नही बनाया, सन्यास लेकर निकल गए। तुम सन्यास न ले सको तो लोकोदय तीर्थ में दान दे दो। अपने पिता से कहना तुम चिंता मत करो आपने मुझे मकान में जन्म दिया है तो आपकी मृत्यु भी मेरे मकान में होगी। बेटे के मकान का नांगल करो, अपने मकान को दान में दो, जाओ जन्म जन्म के लिए एक दिन सिद्धालय को पा जाओगे। जिसका आनंद समस्त आगरा सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उठा रहे हैं। शुभम जैन ने बताया कि विधान में धर्मसभा संचालन मनोज जैन बाकलीवल ने किया|
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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