मेरा” यदि कर्तव्य के साथ जुड़ता है,तो जीवन उच्चता को प्राप्त होता है,वही “मेरा” यदि अहंकार के साथ जुड़ता है तो जीवन तहस नहस हो जाता है”- मुनि श्री प्रमाण सागर 

धर्म

“मेरा” यदि कर्तव्य के साथ जुड़ता है,तो जीवन उच्चता को प्राप्त होता है,वही “मेरा” यदि अहंकार के साथ जुड़ता है तो जीवन तहस नहस हो जाता है”- मुनि श्री प्रमाण सागर 

 भोपाल 

अवधपुरी में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य भावनायोग शंका समाधान प्रवर्तक मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में 1008 भगवान महावीर स्वामी का निर्वाणकल्याणक महोत्सव 21 अक्टूबर मंगलवार को विद्याप्रमाण गुरुकुलम् के विशाल प्रांगण अवधपुरी में प्रातः9 बजे निर्वाण लाड़ू चढ़ाकर मनाया जाएगा।

 

 

 

 प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया इसी के साथ ही मुनिसंघ के चातुर्मास का निष्ठापन हो जाएगा। आगामी 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक सागर जिले के राहतगढ़ में चतुर्थ नवीन जिनालय के जिनबिंबों का पंचकल्याणक मुनिसंघ के सानिध्य में होंने जा रहा है।आगामी 7-8-9 नवंबर को विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में तीन दिवसीय विशेष अंतिम कार्यक्रम है जिसमें भोपाल और भोपाल के आसपास के सभी महानुभाव भाग लेकर पुण्य अर्जित करें। निर्धारित कार्यक्रम अनुसार 7 नवंबर शुक्रवार को विद्याप्रमाण गुरूकुलम का शिलान्यास समारोह संपन्न होगा।

 

 

 

 8 नवम्वर शनिवार को गुणायतन का राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न होगा जिसमें देश ही नहीं विदेश से भी गुणायतन के सदस्य पधार रहे है, तथा 9 नवम्वर रविवार को मुनिसंघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह सम्पन्न होगा तत्पश्चात किसी भी दिन मुनिसंघ का मंगल विहार राहतगढ़ की ओर हो सकता है, इसके पश्चात मुनिसंघ द्वारा जनवरी माह में भिण्डर राजस्थान के पंचकल्याणक हेतु उधर की कमेटी को स्वीकृति दी जा चुकी है,

 

 

 

 इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुये कहा “मेरा यदि कर्तव्य के साथ जुड़ता है,तो जीवन उच्चता को प्राप्त होता है,वही मेरा यदि अहंकार के साथ जुड़ता है तो जीवन तहस नहस हो जाता है”*

 

 

जिसके मन में यह भाव बोध जाग्रत हो जाता है कि जगत का एक परमाणु भी मेरा नहीं है, वह मनुष्य घर परिवार में प्रेम और सदभाव को स्थापित करता है,उसके जीवन में दोष और दुर्बलता नहीं होती उसके संबंध अपने आप सभी से मधुर बने रहते है, मुनिश्री कहा कि “मेरा” यदि कर्तव्य के साथ जुड़ता है तो जीवन को आदर्श बनाकर उच्चता को प्राप्त हो जाता है, वही मेरा के साथ अहंकार जुड़ता है,तो जीवन का पतन प्रारंभ हो जाता है,मुनि श्री ने कहा कि आप किसी भी क्षेत्र में काम करो आफिस में हो या घर परिवार में कर्तव्य की भावना से कार्य करोगे तो समस्या का हल निकलेगा और आप प्रशंसा के पात्र बनोगे।

 

 

 

 

 मुनि श्री ने उदाहरण देते हुये कहा कि आजकल पति पत्नी में भी मेरा तेरा होता रहता है,स्थिति भयावह होकर तलाक की स्थिति आ जाती है,उन्होंने कहा कि एक होकर के भी यदि भाव एक नहीं हो रहे है,तो जीवन तो तहस नहस होंना है,मेरा तेरा की भावना से ऊपर उठकर जब समर्पण की भावना आती है तो पति पत्नि हों या भाई भाई उनमें कभी खटपट नहीं होती वह कभी तीन तेरह नहीं होते उन्होंने कहा कि श्रीराम और भरत के हृदय में कोई भेद नहीं था लेकिन मंथरा ने कैकयी के कान भरे और मेरा तेरा का भाव जगाते हुये कह दिया कि भरत तेरा पुत्र है,राम तेरा पुत्र नहीं, भरत यदि राजगद्दी पर बैठेगा तो तुम्हें राजमाता बनने का सौभाग्य मिलेगा वाल्मीकि रामायण में तो यहा तक लिख दिया कि “मंथरा ने कैकयी के ऐसे कान भरे कि राम यदि राजा बने तो कौशल्या राजमाता बनेगी और तुमसे झुठे बर्तन मजवायेगी” इसके पहले केकयी के मन में राम और भरत को लेकर कोई भाव नहीं थे लेकिन वह भी मंथरा की बातों में आ गयी और मेरा तेरा हो गया लेकिन श्री राम और भरत के मन में मेरा तेरा का कोई भाव नहीं थे इधर श्रीराम वन को गये उधर भरत भी राजगद्दी पर नहीं बैठे और कहा कि इस गद्दी पर अधिकार सिर्फ राम का है राम मेरे है और राजगद्दी पर राम के खड़ाऊ रखकर नंदीग्राम में एक साधक की तरह रहे।

 

 

 

मुनि श्री ने कहा कि यह भी भाइयों के बीच का एक आदर्श है,यदि इसकी प्रेरणा लें तो सभी पारिवारिक विवाद समाप्त हो जायें लेकिन आजकल भाईयो की छोड़ो पति पत्नी के बीच ही विवाद होंने लगे है उन्होंने एक हास्य व्यक्त करते हुये कहा कि पत्नी और पति के बीच आजकल इतना भी विश्वास नहीं बचा दोनों ही मोबाइल के पासवर्ड को एक दूसरे से छुपाते है यह क्या है यह डिवाईडेसन की दीवारें है जो मेरा तेरा का कू परिणाम है जिससे समर्पण की भावना समाप्त हो गई है,जो हमारे जीवन के सौन्दर्य को तहस नहस कर रही है। 

 

 

 

अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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