आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य श्रावक संगोष्ठी हुई
रामगंजमंडी
आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में श्रावक संगोष्ठी हुई जिसमें नगर की 30से अधिक प्रतिभाओ ने अपना आलेख प्रस्तुत किया जिसमें गुरुदेव का प्रभाव,जन्मदिन दिन को सार्थक डे के रूप में मनाने पांच पाप, शास्त्र संरक्षण मोबाइल दुष्प्रभाव, उपवास का महत्व, चतुर्मास का प्रभाव, होटल में नही खाना तीर्थ यात्रा का महत्व आठ मद के विषय में प्रकाश डाला गया यह संगोष्ठी बहुत ही अलौकिक है। इसके द्वारा नगर की प्रतिभाएं सबके सामने आई वक्ताओं ने यह भी कहा आचार्य श्री का नाम लेने से सब बाधाएं दूर होती हैं। जैनों की वेशभूषा में आ रहे विकारों पर भी कटाक्ष किया गया। आयोजन की शुरुआत आचार्य श्री विराग सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर की गई साथ ही मंगलाचरण की प्रस्तुति ब्रह्मचारी प्रीती दीदी ने दी इस अवसर पर खुशांशी जैन मित्तल अदभुत नृत्य के साथ अपनी प्रस्तुति दी। इस अवसर पर संरक्षक अजीत सेठी अध्यक्ष दिलीप विनायका ने अपना आलेख प्रस्तुत किया।
आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने कहा समाज के बीच वक्ता होना चाहिए वकुतव कला होना चाहिए ज्ञाता बहुत है वक्ता बहुत कम है वकुतव कला जिसमें आती है वह वक्ता होता है शब्दों का जाल विस्तृत है यदि हम इससे समीचीनता हटा देते हैं तो विषयों में लगा देते हैं।
वकुतव कला ही होती है जो मधुशाला तक लाती है यदि सही सुनाने वाली होती है तो मंदिर तक आ जाता हैं। जिनवाणी शास्त्रों के प्रति भक्ति होती है तो हम धर्मात्मा है। आचार्य श्री ने परिवार को व्यवहारिक तरीके से चलाने की बात की कहा यह श्रावक का कर्तव्य है
संतुष्टि है तो कमजोर भाग्य भी हमारे लिए अच्छा है। भाग्य बुरा इतना नहीं होता जितना हम समझ सकते हैं।



न हमारा जीवन कमजोर है न भाग्य कमजोर है सोच को सही बनाओ। ताकत को समझने का प्रयास करो सब समझ आता है। इस अवसर पर सभी वक्ताओं का सम्मान किया गया साथ ही 2026 के कैलेंडर का विमोचन भी किया गया। वक्ताओं द्वारा आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया एवम शास्त्र भेंट किया गया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

