घर परिवार हो या जीवन व्यवहार भावना के अभाव में सभी रसहीन हैः- मुनिश्री प्रमाणसागर

धर्म

घर परिवार हो या जीवन व्यवहार भावना के अभाव में सभी रसहीन हैः- मुनिश्री प्रमाणसागर

भोपाल (अवधपुरी) “जीवन जब यांत्रिक और मशीनी हो जाता है,तो उस जीवन का कोई औचित्य नहीं रह जाता उसके अंदर से मानवीय संवेदनायें समाप्त हो जाती है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुये व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि “भावनायें हमारे जीवन को एक नई तरंग प्रदान करती है”

 

 

 

भावनाओं में बहूत बड़ी शक्ती होती है, भावनायें यदि प्रबल हों तो बड़े से बड़े कार्य चुटकियों में हो जाते है, जैसे नदी का वेग यदि नियंत्रित है,तो वह धरती को हराभरा रखती है,तथा जीवनदायिनी बनकर सभी का कल्याण करती है,लेकिन यदि वही नदी अनियंत्रित हो जाती है तो वह तटबंधों को तोड़कर बाढ़ की विभिषका में परिवर्तित होकर तबाही उत्पन्न कर देती है,

 

मुनि श्री ने कहा कि यही स्थिति हमारी भावनाओं की है यदि वह नियंत्रित है,तो हमारी चेतना को ऊंचाई देती है”और यदि भावनायें नियंत्रण से शून्य है,तो हमारे जीवन के लिये खतरा बन जाती है। मुनि श्री ने भावनाओं पर अनुशासन की बात करते हुये कहा कि यदि यह कला हमारे अंदर आ गई तो यह बहुत बड़ी शक्ति होगी और अनुशासन के अभाव में यही भावनायें हमारे लिये बहुत बड़ा संकट का कारण भी बन सकती है मुनि श्री ने कहा कि जिस घर में बड़े बुजुर्गों का अनुशासन चलता है,वह घर सुंदर बगीचे के समान महकता है,और जिस घर में भावनात्मक अनुशासन न हों वह घर लडाई झगडा और झंझट और तनाव का केंद्र बन जाता है।

 

 

मुनि श्री ने भावनाओं के रुपांतरण पर चर्चा करते हुये कहा कि यदि हमने इसे नियंत्रण करने की कला सीख ली तो यह हमारे जीवन के लिये कल्याण कारी सिद्ध होगी। मुनि श्री ने कहा कि जैसे क्रोध में आदमी भूखा रह लेता है,तथा वह कार्य भी कर लेता है जो साधारण स्थिति में नहीं कर सकता अर्थात क्रोध में नकारात्मक ऊर्जा है,यदि क्रोध की ऊर्जा परिस्थितियों वश दब गई तो वह कभी ज्वालामुखी की तरह बिस्फोटक बन सकती है, अक्सर ऐसा देखने में आता है कि कुछ लोग जो हमेशा शांत रहते है उनके मुख से अचानक कोई बात भडास बन कर निकलती है, भावनायोग कहता है कि क्रोध को दबाओ मत उसको अनुशासित कर क्षमा में परिवर्तित कर दोगे तो वह साहस की पर्याय भी बन सकता है।

 

 

क्रोध की धारा को बाढ़ में परिवर्तित न होंने दो जो तबाही का कारण बने उस धारा से ऊर्जा उत्पन्न करो अर्थात नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलकर जीवन को रुपांतरण कर सकते है। उपरोक्त जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन ने दी।

 

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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