श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महोत्सव की हुई घोषणा 9 दिसंबर से 15दिस तक होगा महा महोत्सव भारतीय संस्कृति सभ्यता के अपने मायने हैं यहां पश्चिम की सभ्यता को कोई स्थान नहीं है–सुधासागर महाराज
अशोकनगर —
बहु प्रतीक्षित श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन 9दिस से 15 दिसम्बर तक परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ क्षुल्लक श्री गम्भीर सागर जी महाराज क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागर जी महाराज क्षुल्लक श्री विदेह सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में एवं बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भइया सुयश के कुशल निर्देशन होने जा रहा हैं इस हेतु परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज को अशोक नगर जैन समाज एवम थुबोनजी कमेटी ने संत निवास पर श्री फल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया ।
वर्षो से चल रही है पंच कल्याणक महोत्सव की प्रतीक्षा-प्रदीप भइया
जिज्ञासा समाधान के दौरान प्रतिष्ठा चार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भइया ने कहा कि अशोकनगर समाज की वर्षो से भावना थी कि श्री दिगम्बर जैन गांव मन्दिर जो शहर का प्रचीन मन्दिरो में शुमार है और हम सब की भावना है कि बहुत शीघ्र भगवान दिव्य आसन पर विराजमान हो वर्षो से चल रही प्रतीक्षा नगर में हो रहे ऐतिहासिक चातुर्मास के बाद 9दिस से 15 दिसम्बर के बीच भव्य श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा इसके पहले जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल ने कहा कि सन् 1992 में परम पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य में अशोक नगर को पंच कल्याणक महोत्सव बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ने निर्णय लिया है कि परम पूज्य के सान्निध्य में भव्य पंचायत हो इस हेतु पूरी समाज आपके चरणों में प्रार्थना कर रही है 

हम अपने राष्ट्र की सेवा के लिए संघ से कहें हमें भी सेवा का सौभाग्य प्रदान करें सुधाससागर महाराज
इस दौरान परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने कहा कि जो राष्ट्रीय आवाज है उसके लिए कोई जाति नहीं होती कोई धर्म नहीं होता है राष्ट्र के नाम पर हम सब एक हो इसमें हम मिलकर एक हो कर चले जातियों के कारण अलग मत हो ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है ये किसी धर्म का संगठन नहीं है भारत माता की सेवा का संकल्प लेकर काम करने तो उसमें हमें जुड़ना है कोई हम से कहें आप जुड़े नहीं हम अपने राष्ट्र की सेवा के लिए संघ से कहें हमें भी सेवा का सौभाग्य प्रदान करें मैं स्वयं सेवक रहा हूं हमें किसी जाति से दोष्य नहीं है।




हमारा देश की राष्ट्रीय संगठनों को योग्यता पहचाना चाहिये अकेली एक जाति राष्ट्र की रक्षा नहीं कर पायेंगी राष्ट्र के नाम पर हम सब एक हैं कोई साधना करके भारत का गौरव बढ़ा रहा है कोई सैनिक बनकर राष्ट्र का गौरव बढ़ा रहा है हम साधु भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाकर अपनी संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं
सभी वक्ताओ ने कहा कि ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष है इसे राष्ट्र निर्माण के रूप में मनाया जाना चाहिए आप लोग देश में हर तरह की व्यवस्थाओ में जुड़ कर देश सेवा का काम कर रहे हैं।
भारत में पाश्चात्य सभ्यता को कोई स्थान नहीं है
उन्होंने कहा कि भारत वो है जिसमें पाश्चात्य सभ्यता को कोई स्थान नहीं है भारतीय संस्कृति सभ्यता के अपने मायने हैं चूहे का कांटा कपड़ा नहीं चाहिए और टेलर का काटा हुआ कपड़े को देख कर आप उसे पैसे और दें र हे है चाहूं काट रहा उसे विधि का पता नहीं है उसे जोड़ने की विधि पता नहीं है जिसे जोड़ने की विधि पता ना हो वह जगत के किसी काम का नहीं माना जाता।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
