पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का मुनिसंघ सानिध्य में सात फेरी की रथयात्रा के साथ हुआ समापन

धर्म

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का मुनिसंघ सानिध्य में सात फेरी की रथयात्रा के साथ हुआ समापन

इंदौरः
जब तक बंधन महसूस नहीं होता तब तक आप उस बंधन से मुक्त होंने का पुरुषार्थ नहीं करते, भगवान ने अनुभव किया उनको यह संसार दुःखमय लगा और वह सत्ता और वैभव को एक पल में छोड़कर मुक्त हो गये, यदि तुम भी दुःख का अनुभव कर रहे हो तथा दुःख से मुक्ती चाहते हो तो आज से संकल्प कर लेना कि जिस रास्ते पर में अभी तक चल रहा था उस रास्ते पर अब नहीं चलूंगा”

 

उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के समापन अवसर पर व्यक्त किये। मुनि श्री ने पंचकल्याणक समारोह से जुड़े सभी महापात्रों और पात्रों को तथा कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप सभी लोगों ने छह दिन तक खूब धर्म
आरधना की एवं पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया को देखा एवं सभी ने नियम संयम का खूब पालन किया।भगवान ने संसार से घुटन महसूस की और वह इस बंधन से मुक्त हो गये जिस दिन तुम्हें इस संसार से घुटन महसूस होंगी उसी दिन से तुम्हारा भी मोक्षमार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प कर लोगे तो जो भोगवादी दृष्टि है,वह आत्मोनुखी होकर भोग विलास से दृष्टि हट जाएगी। मुनि श्री ने कहा कि जब तक त्याग संयम को अपना आदर्श नही बनाओगे एवं अपनी लाईफ स्टाईल में परिवर्तन नहीं करोगे तब तक आप मोक्ष मार्ग पर नहीं चल सकते। मुनि श्री ने विनोद भाव से पूछा कि अच्छा आप लोगों को आनंद आया कि नहीं? जबाव मिला बहुत आनंद आया मुनि श्री ने कहा कि यदि आप लोगों ने पंचकल्याणक को एक प्रोग्राम की तरह अटेंड किया है तो आपको बहुत आनंद आया होगा लेकिन यदि आपने इसे अपने जीवन का टर्निंग पाइंट बना लिया तो आपके जीवन का उद्धार हो जाऐगा।पूज्य गुरुदेव से किसी श्रावक ने पूछा कि संक्षिप्त में मोक्षमार्ग क्या है?
तो गुरुदेव ने जबाब दिया “आपका मुख जिस तरफ है उस तरफ से अपने मन को मोड़ लो” मुक्ती का संकल्प ही मुक्ती का प्रयास है, मुनि श्री ने कहा कि मेरे से एक युवक ने पूछा कि “पंचमकाल में मोक्ष नहीं है, फिर आप मुनि क्यों बने?तो मुनि श्री ने जबाब दिया में मोक्ष पाने के लिये मुनि नहीं बना में मोक्षमार्ग पर चलने के लिये मुनि बना हुं” बधन की अनुभूति ही मुक्ति का संकल्प है,

प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया अनुष्ठान के उपरांत विश्वशांति महायज्ञ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का समापन हवन एवं भगवान की रथयात्रा सात फेरी के साथ संपन्न हुआ इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज,मुनि श्री निश्वार्थ सागर महाराज,मुनि श्री संधान सागर महाराज मुनि श्री निसर्ग सागर महाराज क्षु.श्री आदर सागर,समादरसागर, चिद्रूपसागर,स्वरुपसागर,सुभगसागर महाराज सहित प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया,अभय भैया,नितिन भैया,अनिल भैया,मुकेश भैया सहित उदासीन आश्रम एवं महिला आश्रम की बहनें साथ में रही।मीडिया प्रभारी राहुल जैन एवं प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया प्रातःकालीन बेला में भगवान को मोक्ष हुआ इंद्रों ने मिलकर उत्सव मनाया एवं मोक्षकल्याणक की पूजा संपन्न की तत्पश्चात नितिन भैया एवं अमित वास्तु ने विश्वशांति महायज्ञ हवन के साथ सभा में उपस्थित सभी देवी देवताओं से क्षमा मांगते हुये समापन किया।
इस अवसर पर पंचकल्याणक समिति
के संयोजक हर्ष जैन,अध्यक्ष अशोक रानी डोसी,नवीन गोधा,जिनेश झांझरी, पवन सिंघई वैभवनगर मंदिर कमेटी अध्यक्ष विनोद जैन,मुकेश पाटोदी सहित पंचकल्याणक के पात्रों ने सभी प्रतिष्ठाचार्यों तथा प्रवक्ता अविनाश जैन, एवं मुनि सेवा से जुड़े
विवेक जैन कुनकुरी, अक्षय जैन, , अनिकेत जैन,मोनू जैन,सचिन जैन इंफोसिस सहित समस्त कार्यकर्ताओं का तिलक श्रीफल से सम्मान किया। संचालन अशोक भैया लिधोरा ने किया। अपरान्ह 2 बजे मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी एवं निसर्ग सागर महाराज का विहार अन्य कालोनी की ओर हुआ।प्रवक्ता एवं प्रचार प्रमुख अविनाश जैन एवं राहुल जैन ने बताया गोकुल नगर जैन मंदिर में कलशारोहण का सौभाग्य प्रजेश दीपा जैन सौंरया सौधर्म परिवार उदयनगर को प्राप्त हुआ मुनिसंघ वैभव नगर में विराजमान है रविवार 8 दिसं को मंगलविहार प्रातः7 बजे तिलक नगर की ओर होगा एवं 8:30 बजे से प्रवचन कृष्णा पब्लिक स्कूल में होंगे आहारचर्या भी वही संपन्न होगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *