आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी का होगा आयोजन
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन हो रहा जिसमें देश भर के विद्वत भाग लेंगे यह संगोष्ठी 1 व 2oct को होगी।
मंगलवार की बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि ज्ञान संसार में जितने जीव है सबके पास है ज्ञान सबके काम आता है।
जानना दो ही चीजे है या तो हम अपने आप को जाने या दूसरे को जाने हम अपने आपको तो नहीं जानते लेकिन हम दूसरे को जानते है। हम दूसरों को जानने का प्रयास करते हैं और अपने आप को नहीं जानते हम दूसरों को जानने की कोशिश करते रहते हैं। खुद को जानने की कोशिश ही नहीं करते।

उन्होंने कहा कि यदि हमें स्वयं को जानना है तो ज्ञान को सम्यक बनाना पड़ता है। इसका मतलब है सत्य जिसको जैसा देखे उसको वैसा ही समझे सम्यक ज्ञान है जो द्रव्य जैसा है उसे वैसा ही समझे वह सत्य है सम्यक ज्ञान है। यदि इसके विपरीत है तब वह मिथ्या ज्ञान है। यदि अंदर से भाव आता है कि हम अपने आप को जाने तो समझ लेना सम्यकज्ञान है। ज्ञान सम्यकज्ञान मोक्षमार्ग में बहुउपयोगी है।
आचार्य श्री ने कहा ज्ञान को जाग्रत करो सम्यकज्ञान परिश्रम मांगता है ज्ञान ही हमें जाग्रत करता है जिनवाणी का मतलब है यह सीधे हमें गोद में बिठाकर सिद्धालय में ले जाती है। जिनवाणी में विशेषता है कि यह जीव को संसार से निकलकर अध्यात्म और मोक्ष में प्रवेश कराती है। ज्ञान के बिना कुछ नहीं वह भी सम्यकज्ञान यह ज्ञान ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त करता है और कोई नहीं। 



सम्यकज्ञान स्पष्ट बताता है कि क्या सत्य है क्या असत्य है क्या स्वीकार करना है क्या नहीं। अंत समय ज्ञान ही काम आएगा सोच पाओगे नहीं पाओगे, यदि सम्यकज्ञान होगा तो सद्गति होगी मिथ्या ज्ञान होगा तो दुर्गति होगी। स्वाध्याय ही हमें जागृत करता है शास्त्र ही निमित्त हैं और इन्हीं के द्वारा ज्ञान को जाग्रत करो।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

