मन अपने संबंध में कम सोचता है दूसरो के संबंध में अधिक सोचता है-मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज

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मन अपने संबंध में कम सोचता है दूसरो के संबंध में अधिक सोचता है-मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज

अशोक नगर– मन अपने संबंध में कम सोचता है दूसरो के संबंध में अधिक सोचता है किसी की बुराई की बात ध्यान आते ही ऐसा डूब जाता है कि उसे ख्याल ही नहीं रहता वह है कहा क्या करने निकला था और क्या कर रहा है यदि इस मन से कह दिया जाये के तू अपने आप को तो देख उसकी दृष्टि अपने आप पर जाएगी ही नहीं ध्यान लगाकर देखें अपनी आत्मा के चिंतन में एक मिनिट को भी आपका मन नहीं टिकेगा हमारे पास अपने आप के लिए समय ही नहीं है जब देखो दूसरे के लिए ही सोचते रहते हैं अपने मन को थोड़ा लगाम दो और अपनी ओर आने की कोशिश करो उक्त आश्य के उद्गार सुभाष गंज में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।

 

 

 

 

इसके पूर्व छिंदवाड़ा जैन समाज से सवा सौ भक्तों के साथ ही महिला मंडल को परम पूज्य गुरुदेव मुनिपुंगव श्रीसुधा सागर जी महाराज की महा पूजा का सौभाग्य प्राप्त हुआ

 

 

 

बच्चों की ज़िद पूरी नहीं करना* 

उन्होंने कहा कि कभी बेटे की इच्छा पूरी नहीं करना शायद ही कोई ऐसा बेटा बिटिया होगे जिसने अपने मां बाप से इच्छाएं पूरी नहीं कराई होगी यह तक की बच्चे धमकी तक दे देते हैं धमकी देने वाला कभी मरता नहीं है ये दुर्योधन की तरह है दुर्योधन ने यही तो किया था धृतराष्ट्र को धमकीं देकर एक चाल चली राज आज्ञा से धूतक्रिड़ा आयोजित की गई उसे पता था कि धर्मात्मा की सबसे बड़ी कमजोरी बड़े की आज्ञा का पालन करना और शकुनी मामा ने उन्हें किस तरह से निपटाया और क्या हुआ आप को पता है ये तो सतयुग की बात थी आज तो घर घर में दुर्योधन पैदा हो रहे हैं यहा मोटीवेशन अपने बेटे बेटियों की ज़िदो को पूरा नहीं करना है।

आप कुछ भी नियम मत लेना एक ही नियम ले मैं अपनी इच्छाओं की पूर्ति माता पिता से नहीं कराऊंगा। 

 

  संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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