अंजनरी की जैन धरोहर : खोती पहचान और हमारी ज़िम्मेदारी
अंजनरी पर्वत, त्र्यंबकेश्वर रोड पर स्थित गुफाएँ प्राचीन काल से जैन धर्म की महत्वपूर्ण साधना स्थली रही हैं। विशेष रूप से अंजनरी गुफा संख्या 2 को जैन परंपरा में भगवान अरहनाथ की साधना गुफा माना जाता है। गुफा के भीतर आज भी जैन प्रतिमा के चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
लेकिन दुर्भाग्यवश समय के साथ इस गुफा की वास्तविकता को विकृत कर दिया गया। पहले इसे मच्छिन्द्रनाथ गुफा कहा गया और बाद में अंजनरी को “हनुमान जन्मभूमि” से जोड़ने के प्रयासों में इस गुफा को भी हनुमान जन्म गुफा घोषित कर दिया गया। यह सब उस समय हुआ जब जैन समाज ने नीचे तालेटी में धर्मशाला का निर्माण किया और गुफा संख्या 1 को सुरक्षित किया। गुफा संख्या 2, जो पहले ही नाथ संप्रदाय के नियंत्रण में थी, धीरे-धीरे पूरी तरह “हनुमान जन्म स्थल” में बदल दी गई।

स्थिति यहाँ तक बिगड़ चुकी है किगाँव का प्राचीन जैन मंदिर परिसर भी आज चक्रधर संप्रदाय के कब्ज़े में है।जबकि यह स्थल सरकारी विभाग के रिकॉर्ड में अब भी जैन मंदिर के रूप में दर्ज है।
स्थानीय जैन समाज असहाय है क्योंकि बहुसंख्यक समाज के दबाव के चलते वे संघर्ष करने से डरते हैं। उनका कहना है – “अगर हम ज्यादा विरोध करेंगे तो जो गुफा संख्या 1 हमारे पास है, वह भी छिन सकती है।”

यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। एक ओर केंद्रीय पुरातत्व विभाग (ASI) के अधीन नीचे के 16 जैन मंदिर आज भी दर्ज और संरक्षित हैं, वहीं गुफाएँ राज्य पुरातत्व विभाग के अधीन होने के बावजूद दशकों से उपेक्षित हैं। पिछले 15–20 वर्षों में राज्य विभाग ने कोई ठोस पहल नहीं की है।
“करीब 15–17 वर्ष पहले भी जब जैन साधक वहाँ गए थे, तब गुफा संख्या 2 नाथ संप्रदाय के नियंत्रण में थी और उसे मच्छिन्द्रनाथ गुफा कहा जाता था। बाद में इसे हनुमान जन्म स्थल बना दिया गया, ताकि अंजनरी का पूरा महत्व जैन इतिहास से हटाकर केवल हिंदू मान्यता से जोड़ा जा सके।”
आगे का रास्ता
अब वक्त आ गया है कि हम केवल गुफा संख्या 2 के विवाद में उलझने की बजाय, सबसे पहले नीचे के मंदिर परिसरों को चक्रधर संप्रदाय के कब्ज़े से मुक्त कराने का प्रयास करें। यह हमारे पास पुख्ता दस्तावेज़ और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज धरोहर है, जिस पर हमारी दावेदारी मज़बूत है।
साथ ही, हमें समाज को जागरूक करना होगा कि–अंजनरी केवल “हनुमान जन्मभूमि” नहीं, बल्कि जैन साधना और भगवान अरहनाथ की धरोहर भी है।हमारी चुप्पी से धीरे-धीरे एक-एक कर हमारी धरोहरें हाथ से निकलती जाएँगी।जब तक हम अपनी ऐतिहासिक सच्चाइयों को सामने नहीं लाएँगे, तब तक आने वाली पीढ़ियों के लिए यह विरासत खो जाएगी।
जैन समाज और जागरूक नागरिकों को एकजुट होकर सरकार, प्रशासन और पुरातत्व विभाग से ठोस कदम उठाने की माँग करनी चाहिए। यह सिर्फ जैनों की लड़ाई नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर बचाने की जिम्मेदारी है। शुभम जैन G.E.O.जैनिज्म से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





